प्रॉडक्टिविटी चाहिये, तो इन आदतों को दूर भगाइये

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जीवन में कुछ आदतें ऐसी बन जाती है, जो धीरे-धीरे प्रॉडक्टिविटी को चोट पहुंचाती हैं। वह आपके फैसले लेने की क्षमता को कम करने लगती हैं, साथ ही आपकी क्रिएटिविटी को भी कम कर देती हैं। अगर आपको लगता है कि आप में भी नीचे दी गई आदतें है, तो उसे छोड़ना बहुत ज़रूरी है। यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा की एक स्टडी के अनुसार ऐसा करना आपके शॉर्ट एवं लांग रन में खुश रहने के लिये भी मददगार है। हो सकता है कि अपनी आदतों पर काबू पाने में आपको शुरु में समय लगे, क्योंकि जिस तरह कोई भी ‘आदत’ एक दिन में बनती नहीं है, उसी तरह उसे बदलने में भी समय लगता है।

आइये नज़र डालते हैं उन बुरी आदतों पर, जिनका असर आपकी प्रॉडक्टिविटी को कम करता हैः-

इंटरनेट सर्फ करने की लालसा

प्रॉडक्टिविटी चाहिये, तो इन आदतों को दूर भगाइये
लाइफ में प्रॉडक्टिविटी है ज़रुरी  | इमेज : फाइल इमेज

कई रिसर्च इस बात को साबित कर चुकी हैं कि किसी व्यक्ति को काम के फ्लो में आने के लिये 15 मिनट लगते हैं और एक बार वह फ्लो में आ जाये, तो उसकी प्रॉडक्टिविटी पांच गुना बढ़ जाती है। हालांकि इंटरनेट आपको इंफोर्मेशन देने का एक बेहतरीन ज़रिया है, लेकिन अगर आप इंटरनेट एप्स पर आये अपडेट्स पढ़ने की लालसा के चलते हर थोड़ी देर में अपना फोन चेक करते हैं, तो आपका फ्लो टूट जाता है। ध्यान देने वाली बात है कि बार-बार अपना फोन चेक करना गलत आदत है।

परफेक्शन पाने की चाह

कई बार आप किसी काम को परफेक्ट करने के लिये नये आइडिया ढूंढते रहते हैं, जिस वजह से आप काम को शुरु ही नहीं कर पाते। किसी भी काम को परफेक्ट करने के लिये पहले उसकी शुरुआत करना ज़रूरी है, बाद में आप उसमें ज़रूरी चेंज करके बेहतर बना सकते हैं।

मीटिंग्स कम करें

प्रॉडटेक्टिव लोग जानते हैं कि मीटिंग्स आपका कीमती समय छीन लेती हैं, इसलिये मीटिंग्स केवल ज़रूरी बातों के लिए ही रखें। ऐसा करने से मीटिंग में मौजूद सभी लोग फोकस्ड रहते हैं और उनकी एफिशियंसी भी बरकरार रहती है।

बार बार ई-मेल्स पढ़ने से बचें

प्रॉडक्टिविटी चाहिये, तो इन आदतों को दूर भगाइये
लाइफ में प्रॉडक्टिविटी है ज़रुरी  | इमेज : फाइल इमेज

अगर आप काम के बीच में बार-बार अपने ई-मेल्स को पढ़ेंगे, तो आपके काम का फ्लो टूटता रहेगा। इसलिए अपने ईमेल्स की प्रयोरिटी को सेट करें। ऐसा करने से आपको पता रहेगा कि कौन से ई-मेल का आपको तुरंत जवाब देना है।

बार बार अलार्म को आगे न बढ़ाये

कई लोग नींद से जागने के लिये अलार्म तो सेट कर देते हैं, लेकिन अलार्म बजने पर उसे बार-बार 10-15 मिनट आगे बढ़ा देते है। जब आप एक रेग्युलर साइकल में काम कर रहे होते हैं, तो आपके दिमाग को पता होता है कि अब जागने का समय हो गया है, और उस समय आपका दिमाग अलर्ट हो जाता है। यदि आप बार-बार सोते है, तो आपका ब्रेन कंफ्यूज हो जाता है। फिर जब आप थोड़ी देर बाद उठते हैं, तो फ्रेश होने की बजाय आप थका हुआ महसूस करते हैं।

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