बचपन से सिखाएं शुक्रिया कहना

बच्चों में डालें आभार व्यक्त करने की आदत
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बचपन में सीखी हुई बातों को बच्चे कभी नहीं भूलते। छोटी उम्र में अगर उनमें अच्छी आदतें डाली जाएं, तो बच्चों को हमेशा याद रहती है। वैसे तो बच्चे को आसानी से धन्यवाद कहना सिखाया जा सकता है। लेकिन क्या आप उनमें वास्तविक आभार होने की भावना पैदा कर पाते हैं? यह करना आसान बात नहीं है, लेकिन इतना मुश्किल भी नहीं है। तो चलिए जानते हैं कि आप अपने बच्चों को थैंक यू बोलना और आभार व्यक्त करना कैसे सीखा सकते हैं। 

प्लीज़, माफी मांगना और धन्यवाद बोलना

इंसान का विनम्र होना उसके सुंदर स्वभाव को दर्शाता है। बेहतर इंसान बनने के लिए विनम्रता सबसे पहली सीढ़ी है। इस कड़ी में आप बच्चे को प्लीज व धन्यवाद व सॉरी बोलना ज़रूर सिखाएं। इन शब्दों से बच्चों में शिष्टाचार की भावना झलकती है।

बच्चों के रोल मॉडल बनें

एक रोल मॉडल बनने का मतलब है कि आप जो बच्चे को बता रहे हैं, वैसे खुद भी बनें, क्योंकि  बच्चा हमेशा वही करता है, जो उसके आसपास के लोग कर रहे हैं। जैसे आप दूसरों के साथ कैसा बर्ताव करते हैं, कैसे बोलते हैं, ये सब आदते बच्चा आप से ही सीखता है। इसलिए उनके लिए पहले आप रोल मॉडल बनिए। अपने जीवन में छोटी और बड़ी चीज़ों के लिए आभार जताएं और लोगों को हर छोटे-बड़े कामों के लिए शुक्रिया कहें। इस बात का पूरा ख्याल रखें कि जब ये सब हो रहा हो, तो आपका बच्चा इसे देख रहा हो। इस तरह हर छोटी चीज़ के लिए थैंक यू बोलना सिखाकर  आप उसे भविष्य के लिए एक बेहतर इंसान के रूप में तैयार कर सकते हैं।

घर की छोटी-बड़ी चीजों में बच्चे से लें मदद |इमेज : फाइल इमेज

सवाल पूछें, किस चीज़ के लिए आभार या शुक्रगुज़ार है

हर रात, बस कुछ समय निकालकर बच्चों से कम से कम तीन ऐसी चीज़ों की लिस्ट बनाने के लिए कहें, जिनसे उन्हें आज खुशी मिली या वे जिसके लिए आभारी है या उन्होंने धन्यवाद। ऐसा करके उसे समझ आएगी कि जीवन में धन्यवाद कहने से मन को खुशी मिलती है और जल्द ही यह उसकी आदत बन जाएगी।

मदद करना सिखाएं

घर की छोटी-बड़ी चीजों में बच्चे से मदद लें और उन्हें इसके लिए शुक्रिया कहें। फिर आप उनके कामों में भी उनकी मदद करें और उनसे धन्यवाद कहने को बोलें। इसी तरह उन्हें आसपास के लोगों की मदद करना सिखाएं। इससे उनमें कृतज्ञता की भावना पैदा होगी और वह मानवीय भावनाओं को समझना सीखेंगे।

चीज़ों को आपस में बांटना सिखाएं

बच्चों में अपने हर छोटी बड़ी चीज़ों को शेयर करना सिखाएं। उन्हें बताएं कि शेयर करने से क्या होता है, कैसे किसी के चेहरे पर मुस्कान ला सकते है और यह कितनी आसान और अच्छी बात है। इस तरह की छोटी-छोटी आदतों का आदी बना कर आप उन्हें एक बेहतर नागरिक के रूप में तैयार कर सकते हैं। 

धन्यवाद नोट्स लिखना सिखाएं

बच्चों में धन्यवाद नोट लिखने की आदत डलवाएं, ताकि वे किसी को भी प्यार और आदर भाव से आभार व्यक्त कर सकें। ये सीख व्यक्तिगत और प्रोफेशन दोनों में काम आती है।

और भी पढ़िये : बोलने के साथ दूसरों को सुनना भी क्यों ज़रूरी है?

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