परफेक्ट मां नहीं, सिर्फ मां बनें

परफेक्ट मां नहीं, सिर्फ मां बनें

सुपरमॉम बनने की कोशिश आखिर क्यों?
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आपने बच्चों को डांट लगाई और अब आपको बुरा लग रहा है। ऑफिस की मीटिंग में ज़्यादा वक़्त लग जाने के कारण बच्चे की स्कूल में पैरेंट्स-टीचर मीटिंग नहीं अटेंड कर पाई, तो आपको गिल्टी महसूस हो रहा है। आखिर क्यों आप एक मां के रूप में हर काम, ज़िम्मेदारी निभाने में परफेक्ट होना चाहती हैं। परफेक्ट बनने की चाह में आखिर क्यों आप खुद के साथ सख्त हो जाती है और बच्चे के साथ भी।

सच कहूं तो अपराधबोध की भावना या गिल्ट फीलिंग हर मां की ज़िंदगी का हिस्सा बन चुका है। यह अपराधबोध की भावना उपजी है अवास्तविक सोशल मीडिया पोस्ट से जैसे बच्चे के लिए हेल्दी ब्रेकफास्ट ऐसा होना चाहिए, बच्चे के साथ मां को फलां तरह की गतिविधियां करनी चाहिए, समाज/परिवार के दबाव से। फिर जब यह अपराधबोध की भावना एक व्यक्ति के तौर पर आप पर हावी होने लगती है और आपको लगता है कि आप बच्चे के लिए कुछ नहीं कर पा रहीं तो चिड़चिड़ी हो जाती हैं और खुद पर ही गुस्सा आता है। कई बार इस गिल्ट फीलिंग से बचने के लिए आप बच्चे को कुछ जंक फूड जैसी चीज़ें खिलाकर उसे खुश करने की कोशिश करती हैं, कभी-कभार तो यह सही है, लेकिन हर रोज़ के लिए यह आदत अच्छी नहीं है। याद रखिए आप सुपरवुमन नहीं हैं जो एक साथ सारी चीज़ों को परफेक्ट तरीके से कर लें।

कैसे बाहर आए गिल्ट फीलिंग से?

अपने लिए अवास्तविक पैमाना तय न करें

आप चाहे कामकाजी मां हो या हाउस वाइफ याद रखिए कि आप सब कुछ नहीं कर सकतीं, इसलिए अपने काम और फैसलों पर भरोसा रखते हुए अपने लिए अवास्तविक पैमाना तय मत करिए। परफेक्ट बनने से ज़्यादा ज़रूरी है अपने बच्चे का विश्वास जीतना। घर को सुसज्जित करने और परफेक्ट परांठा बनाने के कहीं ज़्यादा अहम है बच्चे के साथ अच्छी तरह जुड़ाव होना। घर को फ्रेश रखने से ज़्यादा ज़रूरी है, बच्चे को गले लगाकर प्यार देना।

काम की लिस्ट बनाएं

सुबह होते हैं ढेरों काम को लेकर परेशान न होना पड़े इसके लिए हर दिन काम की लिस्ट बनाएं। इससे आप काम को अच्छी तरह और समय पर कर पाएंगी। हो सकता है हर बार उसे फॉलो करना संभव न हो, मगर इस तरह लिस्ट बना लेने पर आप इंस्टाग्राम और सोशल मीडिया पर फालतू समय बर्बाद करने से बच जाएंगी।  

मदद मांगे

आसपास के लोगों जैसे बच्चे के दादा-दादी, परिवार के अन्य सदस्य, पड़ोसी, दोस्तों और कामवाली बाई की बेझिझक मदद लें। इससे आपको अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल ज़िम्मेदारियों के लिए ज़्यादा समय मिल जाएगा।

 मी टाइम

अपने और बच्चे के साथ सौम्य व्यवहार करें। कुछ समय खुद के लिए निकालें। थोड़ी ब्रीदिंग एक्सरसाइज़ करें, आराम से बैठकर एक कप चाय पीएं, थोड़ी देर चैन की नींद लें। दिन के किसी भी समय बच्चे को प्यार से गले लगाएं और उससे कहें कि आपको इस पल में कितना आनंद आता है।

अपने निर्णय पर भरोसा रखें

हर किसी के भौंहे चढ़ाने के बावजूद यदि बच्चे के बुरे बर्ताव के लिए आप उसे डांट लगाना चाहती हैं, तो बेझिझक डांटिए। अपने अंतर्मन की आवाज़ सुनें और बच्चे पर विश्वास रखना सीखें। यदि बच्चा आपके साथ खेलना चाहता है और आप व्यस्त हैं, तो खेलने के लिए बाद का समय निश्चित करें। याद रखिए बच्चे का साथ ज़्यादा समय नहीं अच्छा यानी क्वालिटी टाइम बिताना ज़रूरी है। पैरेंटिंग कोई दौड़ नहीं है जिसमें आपको जीतना है। यह एक जुड़ाव है जिसे आप आगे बढ़ाती हैं, पोषित करती हैं। तो अगली बार बच्चे का कोई काम न करने या उसके साथ समय न बिता पाने पर अपराधबोध से ग्रस्त न हों।

और भी पढ़िये : भावनाओं को सेहतमंद बनाने के 5 उपाय

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