लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल

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देश की आज़ादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाने वाले स्वतंत्रता सेनानी सरदार वल्ल्भ भाई पटेल ने न सिर्फ आज़ादी के पहले, बल्कि आज़ादी के बाद भी देश के निर्माण में अहम भूमिका निभाई।

ब्रिटिश सरकार के घोर विरोधी

सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर, 1875 में गुजरात के नाडियाड में हुआ था। उनके पिता का नाम झवेरभाई पटेल और मां का नाम लाड़बाई था। सरदार पटेल की शुरुआती पढ़ाई प्राथमिक विद्यालय और पेटलाद स्थित हाई स्कूल से हुई। आपको जानकर शायद हैरानी होगी, लेकिन उन्होंने 22 साल की उम्र में मैट्रिक की परीक्षा पास की। उसके बाद वह लॉ की परीक्षा की तैयारी करने लगे। पटेल लॉ की डिग्री लेने इंग्लैंड गये और 1913 में लॉ की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह देश लौट आये। उस समय ब्रिटिश सरकार ने उन्हें बहुत लुभावने पद दिये, लेकिन ब्रिटिश सरकार के घोर विरोधी पटेल ने उनका कोई प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया।

‘सरदार’ की उपाधि

गांधी जी के विचारों से प्रभावित सरदार पटेल ने स्वतंत्रता आंदोलन में बहुत अहम भूमिका निभाई थी। बारडोली सत्याग्रह, भारतीय स्वाधीनता संग्राम का बहुत महत्वपूर्ण किसान आंदोलन था, जो 1928 में गुजरात में हुआ।

लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल
एकता की मिसाल है सरदार पटेल  | इमेज : विकिपीडिया

इस आंदोलन का नेतृत्व वल्लभ भाई पटेल ने किया था। उस समय प्रांतीय सरकार ने किसानों का टैक्स 30 प्रतिशत तक बढ़ा दिया था, जिसका पटेल ने जमकर विरोध किया। उनके विरोध में किसान भी शामिल हो गये। अंत में ब्रिटिश सरकार को झुकना पड़ा। इस आंदोलन की सफलता के बाद वहां की महिलाओं ने वल्लभभाई पटेल को ‘सरदार’ की उपाधि दी।

रियासतों का विलय

आज़ादी के बाद पहले तीन साल तक सरदार पटेल देश के उप-प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, सूचना प्रसारण मंत्री बने रहे।  इस दौरान उन्होंने भारत के कई रजवाड़ों को शांतिपूर्ण तरीके से भारतीय संघ में शामिल होने के लिये मना लिया था। उन्होंने करीब 600 छोटी-बड़ी रियासतों को भारत में मिलाया। सरदार पटेल ने आज़ादी से पहले ही पी.वी. मेनन के साथ मिलकर कई देसी राज्यों को भारत में मिलाने का काम शुरू कर दिया था। जिसके बाद तीन रियासतें- हैदराबाद, कश्मीर और जूनागढ़ को छोड़कर बाकी सभी राजवाड़े भारत में शामिल हो गये थे। कुछ समय बाद उनके प्रयासों से जूनागढ़ और हैदराबाद भी भारत का हिस्सा बन गये।

सर्वोच्च नागरिक सम्मान

15 दिसंबर 1950 को सरदार पटेल ने मुंबई में अंतिम सांस ली। मृत्यु के सालों बाद 1991 में उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारतरत्न से सम्मानित किया गया। पटेल की 137वीं जयंती यानी 31 अक्टूबर, 2013 को गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के नर्मदा जिले में सरदार पटेल का विशाल स्मारक बनाया। इसका नाम स्टैच्यू ऑफ यूनिटी है और यह मूर्ति स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से दुगनी ऊंची है।

इमेज : विकिपीडिया

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