मौन रहने के 6 फायदे

मौन रहने से शारीरिक और मानसिक सेहत पर अच्छा असर पड़ता है।
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आप अपने आसपास के माहौल को महूसस करके देखिए, आपको लगेगा कि कितना शोर है। ये शोर बाहर और अंदर दोनों जगह महूसस होगा। बाहरी शोर को तो काबू करना मुश्किल है, लेकिन अपने अंदर के शोर को मौन रहकर कम किया जा सकता है। यह बहुत ज़रुरी भी है, क्योंकि ये शारीरिक और मानसिक सेहत के लिए काफी फायदेमंद है।

मौन रहने के क्या है फायदे –

तेज़ काम करता है दिमाग

अगर दिन में कुछ देर शांत माहौल में शांत बैठते हैं, तो उस वक्त केवल एक ही जगह पर दिमाग लगता है और कहीं ध्यान भी नहीं भटकता। इससे दिमाग तेज़ी से काम करने लगता है। कुछ देर शांत होकर बैठने से ब्रेन सेल्स दोबारा सक्रिय हो जाते हैं। इससे आप ठीक समय पर सही निर्णय लेने में सक्षम होते हैं।  

तनाव होता है दूर

शोर की वजह से तनाव महसूस होता है। यह तब होता है जब आवाज़ की तरंगे कान के जरिये दिमाग तक पहुंचती है और शरीर की इस पर प्रतिक्रिया होती है। इस तरह के तनाव को कम करने के लिए “मौन रहना” सबसे अच्छा तरीका है।

बढ़ती है ऊर्जा

मौन रहने से शरीर ऊर्जावान बना रहता है और हम अपने काम को बेहतर तरीके से करते हैं। बोलने में भी ऊर्जा लगती है। अगर आप बिना वजह बोल रहे हैं, तो अपनी ऊर्जा और क्षमता का गलत इस्तेमाल कर रहे है।

मौन रहने से कई समस्या यूं हल हो जाती है | इमेज : फाइल इमेज
बेहतर होती है बातचीत

मौन रहने से हम दूसरों की बातों को अच्छी तरह सुनते हैं और समझते हैं। इस कारण हमारे सोचने और समझने की शक्ति बढ़ती है। शांति से सामने वाली की बात सुनने से वह सहज महसूस करता है और अपनी बात सरलता से बता पाता है। इससे आत्मविश्वास, आत्मशक्ति, एकाग्रता और मन की शांति बढ़ती है। मौन रहने से व्यक्ति के पॉज़िटिव सोच को बल मिलता है।

कुछ गलत कहने से हैं बचते

कभी-कभी ज़्यादा बोलने की वजह से अपने प्रियजन या दोस्तों को कुछ ऐसा बोल देते हैं जिसकी वजह से रिश्तों में तनाव या झगड़ा हो जाता है। फिर बाद में उस बात के लिए बहुत पछतावा होता है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए मौन रहना सबसे अच्छा उपाय है।

मानसिक शांति

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए व्यक्ति कसरत और पौष्टिक आहार लेता हैं, उसी प्रकार अगर अपने मस्तिष्क को स्वस्थ रखना चाहते हैं, तो मौन रहना सीख लीजिए। मौन से पॉज़िटिव सोच का विकास होता है। व्यक्ति अंदर की ताकत का अनुभव करता है। ध्यान, योग और मौन का रोज़ाना अभ्यास करने से मन और शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है।

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