तनाव कम करने के लिए खुद से करिए पॉज़िटिव बात

पॉज़िटिव सोच तनाव मैनेजमेंट में करती है मदद और रखती है सेहतमंद
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हालात चाहे कैसे भी हो, पॉज़िटिव सोच हो या फिर आशावादी नजरिया ध्यान केंद्रित करने का अच्छा तरीका है। यह व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक सेहत पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है। इसका सीधा मतलब है कि आप जीवन में अच्छे और बुरे को इस उम्मीद के साथ देखते हैं कि चीजें अच्छी ही होंगी।

पॉज़िटिव विचार और खुद से बात करना

पॉज़िटिविटी एक ऐसा व्यवहार है, जिसमें व्यक्ति चीज़ों को अच्‍छे पहलू से देखता है। इससे आशावादी बनने और चुनौतियों के सामने खड़े रहने में मदद मिलती है। सेल्‍फ टॉक यानी की खुद से बातें करना आंतरिक आवाज़ है, जो शायद हर रोज़ व्यक्ति को सुनाई देती है। जब उसे डर या किसी उत्साह या अन्य ऐसी भावना जिसमें वह खुद को दिलासा देने लगता है या खुद से बात करके मन शांत करवाने की कोशिश करता है।

पॉज़िटिव सोच का मतलब है कि जब भी कुछ बुरा घटता है, तो उसे सोचना है कि इस समस्या को कैसे दूर करना है। अक्सर हम कह देते हैं कि जो हुआ है, अच्छे के लिए हुआ है, तो इसका अर्थ है कि हमें परेशानी का समाधान निकाले और फिर जो होगा अच्छा ही होगा। यही सोच पॉज़िटिविटी है।

यदि व्यक्ति के दिमाग में चलने वाले विचार ज़्यादातर नेगेटिव हैं, तो जीवन के प्रति उनका नज़रिया निराशा या तनाव की तरफ बढ़ना संभव है। यदि विचार ज़्यादातर पॉज़िटिव हैं, तो व्यक्ति आशावादी हैं।

पॉज़िटिव बात
खुद से करे पॉज़िटिव बातचीत | इमेज : फाइल इमेज

खुद से पॉज़िटिव बात करने के फायदे

  • डिप्रेशन या तनाव का स्तर कम होता है
  • दुख और दर्द का स्तर कम होता है
  • मानसिक और शारीरिक सेहत बेहतर होता है
  • तनाव और गंभीर हालात में खुद को मनोबल बढ़ता है
  • नेगेटिव विचारों का मानसिक स्थिति पर असर नहीं होता
  • आत्मविश्वास बढ़ता है
  • पॉज़िटिव एनर्जी और उत्साह महसूस करते हैं

खुद से पॉज़िटिव बात करने का तरीका

  1. नेगेटिव बात– मैंने इससे पहले कभी यह काम नहीं किया है।
    पॉज़िटिव बात– यह कुछ नया सीखने का मौका है।
  2. नेगेटिव बात – यह बहुत कठिन है।
    पॉज़िटिव बात– इसे मैं अलग तरीके से कर सकता हूं।
  3. नेगेटिव बात– हमेशा ऐसी घटना मेरे साथ ही क्यों होती है?
    पॉज़िटिव बात– इन हालातों से मुझे सीख मिली है।   

इस तरह सरल नियम का पालन करके खुद से पॉज़िटिव बात करनी शुरुआत करें। खुद से ऐसा कुछ भी न कहें, जो किसी और से न कह पाएं। खुद के साथ विन्रम और प्रोत्साहक रहे। यदि आपके दिमाग में कोई नेगेटिव विचार आता है, तो समझे और पूरी जानकारी के बाद प्रतिक्रिया दें कि क्या ये सही है। उन चीज़ों के बारे में सोचें जिनके लिए आप अपने जीवन में आभारी हैं।

हम अपनी मदद खुद कर सकते हैं, जिसके लिए किसी दूसरों पर निर्भर होना पड़ेगा। केवल खुद पर विश्वास रखें और नेगेटिव विचार आने पर खुद से पॉज़िटिव बात करके हौसला बढ़ाएं।

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