‘ना’ कहना है आसान, आज़माएं कारगर तरीके

अपनी खुशी और सुकून के लिए कभी-कभी ‘ना’ कहना ज़रूरी होता है
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आप हर किसी को खुश करने के चक्कर में हर काम के लिए हामी तो भर देते हैं, लेकिन बाद में समय की कमी और अपने काम पूरे न कर पाने की वजह से तनावग्रस्त और चिड़चिड़े हो जाते हैं, तो आपको अब एक सीमा रेखा खींचनी होगी और ‘ना’ कहना सीखना होगा। क्योंकि आप सुपरमैन/सुपरवुमन नहीं हैं, तो एक साथ सारे काम कर लें। कुछ समय आपको खुद के लिए, परिवार के लिए भी तो चाहिए। इसलिए अब से जो काम क्षमता से बाहर हो उसके लिए ‘ना’ कहना सीख लीजिए।

सोचिए की ‘ना’ क्यों कह रहे हैं?

किसी की मदद करना अच्छी बात है, लेकिन दूसरों की मदद अपने सुकून और खुशियों की तिलांजलि देकर तो नहीं की जा सकती है न। इसलिए यदि कोई आपसे किसी नई ज़िम्मेदारी या काम का अनुरोध करता है, तो पहले यह देखें कि फिलहाल आपकी प्राथमिकता क्या है? खुद को तनावमुक्त करने के लिए संगीत/योग क्लास जाना, परिवार के साथ समय बिताना, बच्चों को बाहर लेकर जाना आदि। जब आपको यह महसूस हो रहा है कि आप सामने वाले का काम करने में असमर्थ हैं, तो उसे ‘ना’ कहने में ही भलाई है।

प्यार से करें मना

‘ना’ कहने का यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि आप सामने वाले को झिड़क दें या गुस्से में कहें  कि मैं आपका काम नहीं कर सकता। बल्कि प्यार और विनम्रता के साथ उनसे कहें ‘आपका यह ऑफर बहुत अच्छा था, मगर माफ कीजिए, अभी मेरे पास बिल्कुल समय नहीं है’ या ‘माफ कीजिए मैं अभी आपका यह काम करने की स्थिति में नहीं हूं।’ इससे सामने वाले को बुरा भी नहीं लगेगा और आप बेकार का तनाव लेने से बच जाएंगे।

अपनी स्थिति से अवगत कराएं

कई बार ऐसा होता है कि आपके बार-बार इनकार करने पर भी सामने वाला आपके पीछे पड़ जाता है किसी काम के लिए, ऐसे में आप बड़ी दुविधा में पड़ जाते हैं कि उसे मना किस तरह करें। तो इसका आसान तरीका है कि उसे अपनी स्थिति से अवगत कराएं कि आप पहले से ही कितनी ज़िम्मेदारियां लेकर बैठे हैं। ऐसे में कुछ नया काम करना या ज़िम्मेदारी लेना आपकी क्षमता से बाहर है। यदि आप वादा कर भी देते हैं, तो उसे पूरा नहीं कर पाएंगे।

ना कहना सीखें
कभी-कभी ना कहना भी हैज़रूरी | इमेज : फाइल इमेज

खुद को दोषी न समझें

फलां व्यक्ति की मदद न कर पानें या उसका काम न कर पाने की वजह से गिल्टी महसूस न करें। अपराधबोध की भावना कुछ समय के लिए भले ही मन में आएगी, लेकिन वह दूर हो जाएगी जब आप इसके बारे में ज़्यादा नहीं सोचेंगे। यह सोचिए कि आपने इनकार करके कुछ गलत नहीं किया है, क्योंकि हर किसी को अपनी ज़िंदगी में सुकून और खुशी पाने का हक है।

याद रखिए कुछ लोगों को आप कभी खुश नहीं कर सकते

घर हो या प्रोफेशनल लाइफ आपको कुछ लोग ऐसे ज़रूर मिले होंगे, जो आपके हर काम में मीनमेख निकालते हैं। ऐसे में अपनी क्षमता से बाहर जाकर यदि सिर्फ उन्हें खुश करने के लिए आप हां कहते हैं, तो नुकसान आपकी ही है, क्योंकि इससे वह तो खुश होने वाले हैं नहीं, उल्टा अधिक ज़िम्मेदारियां आपको तनावग्रस्त ज़रूर कर देंगी। तो अब से बिना सोचे-समझें हर काम के लिए हां कहने की भूल न करें।

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