पॉज़िटिव सोच को बढ़ावा देती हैं ये 5 बातें

पॉज़िटिव सोच को बढ़ाना है आसान
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सुकून भरी ज़िंदगी जीने के लिए पॉज़िटिव सोच बहुत ज़रूरी है। कई अध्ययन भी इस बात की तस्दीक करते हैं कि सकारात्मक सोच शारीरिक और मानसिक सेहत को दुरुस्त रखता है, लेकिन अक्सर लोग यह समझ नहीं पाते कि अपनी निगेटिव सोच को पॉज़िटिव कैसे बनाया जाए? यदि आप भी कुछ ऐसा ही सोचते हैं तो आपको इस लेख से मदद मिल सकती है।

पॉज़िटिव सोच कोई जादू की छड़ी नहीं है जो पलभर में आपकी सोच को बदल दें, बल्कि इसके लिए आपको लगातार कोशिश करनी होगी और अपने विचारों, सोचने के तरीके और नज़रिए को बदलना होगा और ऐसा एक दिन में तो होगा नहीं। कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर आप अपने दिमाग को सकारात्मक दिशा में ले जा सकते हैं।

सुबह की सकारात्मक शुरुआत

अक्सर आपके साथ भी ऐसा होता होगा, सुबह उठने में लेट हो जाती है फिर हड़बड़ी में काम करते-करते कुछ काम बिगड़ जाता है, जिससे आपका मूड खराब हो जाता है और आपके मन में आता होगा कि आज का दिन ही खराब है। तो ऐसी नेगेटिव सोच की वजह से आपका पूरा दिन नकारात्मक ही होगा। इसकी बजाय सुबह थोड़ा जल्दी उठकर आराम से काम निपटाएं और कुछ देर के लिए आईने के सामने खड़े होकर खुद से बात करें और कहें कि आज का दिन बहुत खूबसूरत होने वाला है, ऐसी सोच आपको पूरे दिन सकारात्मक रखेगी और आप खुशी-खुशी सारा काम कर पाएंगे।

छोटी ही सही, मगर अच्छी चीज़ों पर फोकस करें

हर दिन परफेक्ट हो यह ज़रूरी नहीं, लेकिन जब कभी कोई मुश्किल या चुनौती आए, तो उसके बारे में सोचकर परेशान होने की बजाय दूसरे तरीके से सोचें कि इससे आपको क्या फायदा हुआ या क्या सीख मिली। जैसे- यदि ट्रैफिक में फंस गए तो ऑफिस देर से पहुंचने की टेंशन लेने की बजाय यह सोचिए कि आपको अपने पसंदीदा गाने सुनने का वक्त मिल गया है या किताब के कुछ पन्ने आप और पढ़ सकते हैं। इसी तरह बारिश की वजह से रोड़ पर फैले कीचड़ को देखकर मुंह बनाने की बजाय सोचिए कि इन बारिश की बूंदों ने मौसम को कितना सुहाना बना दिया है।

अपने साथ दूसरों की भी सोच बदलो | इमेज : फाइल इमेज

हंसी-मज़ाक के लिए अपने दिल/दिमाग के दरवाज़े खोले रखिए

 अध्ययन भी कहते हैं कि हंसने से स्ट्रेस, एंग्ज़ाइटी और डिप्रेशन दूर होता है। इससे आपका बुरा वक्त आने से रुक तो नहीं सकता, लेकिन हां, उसे मुश्किल वक़्त का सामना आप धैर्य और साहस से ज़रूर कर सकते हैं।

खुद से करें पॉज़िटिव बातें

सेल्फ टॉक यानी खुद से बात करना भी ज़रूरी है, लेकिन सिर्फ सकारात्मक बातें। ‘मैं कुछ नहीं कर सकता, मैं फेल हो गया कि बजाय कहिए अब मैं पहले से ज़्यादा मेहनत करूंगा और सफल हो जाउंगा।’ ‘मैं कुछ नहीं कर सकता कि बजाय कहिए मैं सब कर सकता हूं।’

नकारात्मक लोगों के आसपास न रहें

किसी भी ऐसे दोस्त, कलीग या रिश्तेदार के आसपास न रहें जो नकारात्मक बातें करता हो या आपका मनोबल गिराने की कोशिश करता हो। पॉज़िटिव सोच वाले इंसान के आसपास रहने से आपकी सोच भी सकारात्मक हो जाएगी।

और भी पढ़िये : बोरियत भी हो सकती है पॉज़िटिव, जानिए कैसे?

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