निस्वार्थ सेवा की प्रेरणा दे रहे हैं ये लोग: 17 मई से 21 मई

कोरोना काल में हमारे हीरोज के सरहानीय काम
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कोरोना काल में लोगों के लिए निस्वार्थ सेवा में जुटे हैं हमारे देश के हीरो लोगों की निस्वार्थ मदद कर रहे हैं।पढ़िए इस सप्ताह के हमारे हेरोज की कहानी

कोरोना मरीजों के तनाव को दूर करने के लिए पुस्तकालय

कोरोना रोगियों के समय का सही इस्तेमाल हो सके, इसके लिए नवी मुंबई नगर निगम (NMMC) ने बड़ी पॉज़िटिव पहल शुरु की है। नगर निगम ने कोविड केयर सेंटर में पुस्तकालय की स्थापना की है, ताकि कोरोना मरीज़ों के मानसिक स्वास्थ्य को सही रखा जा सका और उनके अन्दर पॉज़िटिव विचार लाए जा सके। स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों और प्रोटोकॉल के कारण उनकी आवाजाही प्रतिबंधित होने के कारण, उनको किताबों से जोड़ा गया है। एनएमएमसी के प्रमुख अभिजीत बांगड़ ने बताया कि कोविड केयर सेंटर में पुस्तकालय स्थापित करने का उद्देश्य मरीजों का ध्यान नकारात्मक महौल से हटाना है। अपने परिवार से दूर होकर इस खतरनाक वायरस से लड़ते हुए कुछ मरीज उम्मीद खो सकते हैं, और इसका प्रभाव और भी बुरा हो सकता है। लेट्स इंडिया रीड फाउंडेशन इस पहल के साथ जुड़ा है, जिसका मकसद है कि किताबों के ज़रिए मरीज़ों के विचारों में एक नई उम्मीद लाई जाए। इस पुस्तकालय में मराठी, हिंदी और अंग्रेजी की पुस्तके हैं। इस पहल का विचार सेंटर की देखभाल करने वाली टीम को रोगियों से बातचीत करके आया। यह पहल रोगियों के मन और दिमाग के लिए काफी मददगार साबित होगी।

कोरोना मरीजों के इलाज के लिए कार को ही बनाया क्लीनिक

बेंगलुरु में डॉ.सुनील कुमार हेब्बी ने अपनी ही कार को मोबाइल क्लिनिक में बदल दिया है। बेंगलुरु में इसी मोबाइल क्लिनिक के ज़रिए कोविड और गैर-कोविड, दोनों तरह के मरीज़ों का इलाज कर रहे हैं। आसपास के लोग इन्हें अब मोबाइल डॉक्टर के नाम से भी लोग जानने लगे हैं। डॉ. हेब्बी मूल तौर पर विजयपुर जिले के नामादापुरा से ताल्लुक रखते हैं। 37 साल के डॉ हेब्बी ने बीजापुर मेडिकल कॉलेज से 2007 में MBBS की डिग्री ली। वह बेंगलुरु में BBMP कोविड क्लिनिक में रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक कॉन्ट्रेक्ट पर सर्विस करते हैं। सुबह भी चंद घंटे ही सो पाते हैं, क्योंकि उनके मोबाइल पर मरीजों के कॉल और वॉट्सऐप मैसेज आने लगते हैं। फिर वह मोबाइल क्लीनिक से लोगों के इलाज के लिए निकल पड़ते हैं। डॉ. हेब्बी ने अपनी कार को इमरजेंसी दवाएं, मेडिकल उपकरण, ऑक्सीजन सिलेंडर, ईसीजी मशीन आदि से लैस कर रखा है। डॉ. हेब्बी का कहना है कि छोटे गांव से ताल्लुक रखने की वजह से वहां पर उचित स्वास्थ्य सुविधाएं न होने का दर्द को वे अच्छी तरह जानते हैं। डॉ. हेब्बी ने बताया कि कोविड ड्यूटी करने की वजह से उन्होंने अपने माता-पिता को गांव भेज दिया है। पिछले 20 दिनों में मैं करीब 200 लोगों का इलाज कर चुके हैं। उनका ये नेक काम काफी सराहनीय है।

जालंधर में गर्भवती डॉक्टर ने संभाली कोविड केयर सेंटर की कमान

कोरोना महामारी के खिलाफ जंग में डॉक्टरों, नर्सों और अन्य हेल्थ वर्कर्स ने आगे बढ़कर लड़ाई लड़ी है। जालंधर में भी इसकी एक मिसाल देखने को मिली। जालंधर के बस्ती गुजां में चन्नप्रीत सिंह मेमोरियल चैरिटेबल अस्पताल में पहली बार लेवल-1 के मरीजों के लिए कोविड केयर सेंटर खोला गया। इसकी कमान गर्भवती डॉ. रिचा चतरथ ने संभाली। वह यहां की नोडल अफसर हैं। उन्होंने कोविड मरीज़ों के लिए डॉक्टर व स्टाफ से तालमेल और दवाइयों से लेकर उनकी अन्य सभी जरूरतों का ध्यान रखने की जिम्मेदारी संभाली है। 9 महीने की गर्भवती रिचा चतरथ कोरोना को हराने के लिए पूरा प्रयास कर रही हैं। डिलीवरी के बाद वह घर से फोन पर स्टाफ व ट्रस्ट के पदाधिकारियों के साथ तालमेल रखेंगी। उनका कहना है कि उन्हें पता कि गर्भ के दौरान कोरोना से बचकर रहने की ज़रूरत है। वह कोविड नियमों का पूरी तरह से पालन कर रही है। उनके इस साहस के लिए हम उन्हें दिल से सलाम करते हैं।

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तमिलनाडु के एक छोटे से शहर में युवाओं ने पेश की मिसाल

लॉकडाउन के दौरान रोज़ कमाने-खाने वाले परिवारों के लिए रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। ऐसे ही लोगों की मदद करने के लिए तमिलनाडू के तंजावुर जिले के एक छोटे से शहर कुंभकोणम में युवाओं के समूह ने एक सराहनीय कदम उठाया। महामारी के दौरान जिनके पास कमाई का कोई ज़रिया नहीं है, जिन लोगों के पास खाने का सामान नहीं है, उनके लिए ‘अंबु सुवर’ या “दया की दीवार” बनाई है। कोणम में सारंकबनी कोइल सन्निधि गली में स्थित, दीवार के पास सांभर चावल, नींबू चावल, टमाटर चावल और दही चावल जैसे 100 पैकेट रखे गए हैं। अलमारियों में अन्य आवश्यक चीजें भी मौजूद हैं जैसे बिस्कुट के पैकेट और पानी की बोतलें। जिन लोगों को भोजन की ज़रुरत है, वह इस दीवार के पास रखी अलमारी से सामान लेकर खाना खा सकते हैं। आयोजकों ने कहा कि यह सेवा पूरे लॉकडाउन तक जारी रहेगी। ज़रूरतमंद लोगों को भोजन कराने की इस पहल की लोग बहुत तारीफ कर रहे हैं।

मां-बेटे की ये जोड़ी फैला रही है खुशियां

लॉकडाउन के दौरान रोज़ कमाने-खाने वाले परिवारों के लिए रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। ऐसे ही लोगों की मदद करने के लिए तमिलनाडू के तंजावुर जिले के एक छोटे से शहर कुंभकोणम में युवाओं के समूह ने एक सराहनीय कदम उठाया। महामारी के दौरान जिनके पास कमाई का कोई ज़रिया नहीं है, जिन लोगों के पास खाने का सामान नहीं है, उनके लिए ‘अंबु सुवर’ या “दया की दीवार” बनाई है। कोणम में सारंकबनी कोइल सन्निधि गली में स्थित, दीवार के पास सांभर चावल, नींबू चावल, टमाटर चावल और दही चावल जैसे 100 पैकेट रखे गए हैं। अलमारियों में अन्य आवश्यक चीजें भी मौजूद हैं जैसे बिस्कुट के पैकेट और पानी की बोतलें। जिन लोगों को भोजन की ज़रुरत है, वह इस दीवार के पास रखी अलमारी से सामान लेकर खाना खा सकते हैं। आयोजकों ने कहा कि यह सेवा पूरे लॉकडाउन तक जारी रहेगी। ज़रूरतमंद लोगों को भोजन कराने की इस पहल की लोग बहुत तारीफ कर रहे हैं।

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