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समझें अपनी भावनाओं को – गुस्सा

समझें अपनी भावनाओं को – गुस्सा

  • अगर आपका गुस्सा आपको या दूसरों को नुकसान पहुंचाए, तो आपको अपने गुस्से को समझने की ज़रूरत है।
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क्या आपको बात-बात पर गुस्सा आने लगता है, और आपको लगता है कि कोई आपकी बात समझ नहीं पा रहा? अगर हां, तो आप भी उन तमाम लोगों में से एक हैं, जो गुस्से जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। देखा जाएं तो किसी भी भावना की तरह क्रोध भी एक भावना ही है, जिसे एक आम व्यक्ति दिन-प्रति दिन अनुभव करता है। किसी भी भावना को व्यक्त करना बेहद ज़रूरी होता है, लेकिन परेशानी तब आ सकती है जब आपका गुस्सा आपके या सामने वाले व्यक्ति के लिए हानिकारक बन जाए। ज़्यादा गुस्सा करने से आप डिप्रेशन, चिंता, हृदय रोगी, हाई ब्लडप्रेशर के रोगी और कई दूसरे स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से घिर सकते हैं। इसके अलावा अगर आप दूसरों को गुस्से में नुकसान पहुंचाते हैं, तो लोग आपसे दूरी बनाना शुरु कर सकते हैं।

पहचाने अपने गुस्से को?

आपके गुस्से के कारण अलग हो सकते हैं, लेकिन उसे व्यक्त करने के 6 तरीके हो सकते हैं। सबसे पहले आपको अपने गुस्सा व्यक्त करने का तरीका समझना ज़रूरी है, उसके बाद ही आप समझ सकते हैं कि आपका गुस्सा आपके लिए कैसे परिणाम लाएगा।

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  1. पहला तरीका: असर्टिव ऐंगर यानि मुखर क्रोध – इसे अपना गुस्सा व्यक्त करने का कंस्ट्रक्टिव तरीका माना जाता है। इसमें शोर मचाए बिना और किसी को नुकसान पहुंचाए बिना अपनी भावनाएं व्यक्त की जाती हैं, जो आपको सामने वाले के करीब ले आता है। यह एक शक्तिशाली प्रेरक है जिसका उपयोग आप अपने डर और अन्याय को दूर करने के लिए कर सकते हैं। यह आपके जीवन में अच्छे परिणाम लाता है।
  2. दूसरा तरीका: बिहेवरल एंगर यानि व्यवहारिक क्रोध – यह अपने गुस्से को व्यक्त करने एक आक्रामक तरीका है, जिसमें आप दूसरे को चोट पहुंचा देते हैं। इस तरह से गुस्से को व्यक्त करना आपको कानूनी पचड़ों में डाल सकता है या समाज से दूरी बन सकती है।
  3. तीसरा तरीका: क्रॉनिक एंगर यानि पुराना गुस्सा – इस तरह का गुस्सा दूसरों के प्रति हो रही नाराज़गी के चलते आता है। इसमें आप निराशा महसूस करने के साथ-साथ खुद के प्रति गुस्सा महसूस कर सकते हैं। इसकी पहचान है लंबे समय से होने वाली चिड़चिड़ाहट। ऐसे में यह गुस्सा आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। अगर आप खुद को इससे बचाना चाहते हैं, तो आपको अपने अतीत को भूल कर माफ करना होगा।
  4. चौथा तरीका: पैसिव-अग्रेसिव ऐंगर यानि निष्क्रिय-आक्रामक क्रोध – यह आक्रामक क्रोध का विपरीत होता है। इसमें व्यक्ति अपनी भावनाओं को पहचानने से इंकार कर सकता है। ऐसे में उसका गुस्सा उसके व्यंग, चुप्पी, दूसरों का मज़ाक उड़ाने से व्यक्त होता है। इस तरह के व्यक्ति को पता भी नहीं चलता कि उसके बात करने के तरीके की वजह से लोग उससे दूरी बना लेते हैं।
  5. पांचवां तरीका: रिटैलिएट्री ऐंगर यानि प्रतिशोधी गुस्सा – इस तरह का गुस्सा आमतौर पर किसी बाहरी घटना या व्यक्ति द्वारा सामना या हमला किए जाने की सहज प्रतिक्रिया के रूप में देखा जाता है। इस तरह के गुस्से को सबसे आम माना जाता है, क्योंकि यह गलत मानी जाने वाली बात का बदला लेने से प्रेरित है। प्रतिशोधी गुस्सा जानबूझकर भी हो सकता है और इसका उद्देश्य किसी स्थिति या परिणाम पर नियंत्रण करके दूसरों को डराना होता है। इस तरीके से तनाव केवल बढ़ता ही है।
  6. छठा तरीका: सेल्फ एब्यूसिव ऐंगर यानि खुद को नुकसान पहुंचाने वाला क्रोध – इस तरह का गुस्सा आत्म-शर्म की भावनाओं पर आधारित है। जो लोग निराश, अयोग्य, अपमानित या शर्मिंदा महसूस करते हैं, वे उन भावनाओं को आत्मसात कर सकते हैं, खुद से खुद के बारे में नकारात्मक बातें कर सकते हैं, खुद को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे लोग अपने विचार खुद से ही छुपाने के लिए अपने आस-पास के लोगों पर हमला कर सकते हैं, अंतत: अलगाव की भावना को बढ़ा सकते हैं।

कैसा महसूस होता है?

देखा जाए तो गुस्सा एक प्राकृतिक तरीका है अपनी भावनाओं को उस वक्त जताने का, जब आपको किसी से ठेस पहुंचे या आपको लगे कि कोई आपका गलत फायदा उठा रहा है। ऐसे में आप खुद को समझाने में असमर्थ महसूस कर सकते हैं। कई लोग गुस्से को अपनी ढाल बना लेते हैं, लेकिन यह नहीं समझ पाते कि इससे वो खुद को या दूसरों को हानि पहुंचा सकते हैं। आपका गुस्सा आपके लिए अच्छे या बुरे परिणाम दे सकता है। अगर क्रोध व्यक्त करने से आपको गलत समझा जाता है, या दूसरों को चोट पहुंचती है, या आप खुद को अपने ही अंदर समेट लेते हैं, तो नीचे बताए गए सुझावों की मदद ले सकते हैं।

कैसे पाएं अपने गुस्से पर काबू?

  1. दो पल रुक कर सांस लें।
  2. अपनी भावनाओं को समझें।
  3. अपनी परेशानियां किसी के साथ साझा करें।
  4. जो भी साझा करें, सच्चाई के साथ और खुल कर करें।
  5. समाधान निकालने की कोशिश करें।

अगर आपको अपने गुस्से को समझने और उस पर नियंत्रण पाने में मुश्किल होती है, तो आप ऐंगर मैनेजमेंट थेरेपी की मदद ले सकते हैं।

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