प्रकृति के साथ जुड़ना क्यों है ज़रूरी और कैसे करें उसकी सराहना

आप प्रकृति के जितना करीब रहेंगे, उतना ज़्यादा स्वस्थ रहेंगे।
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आपने सुना होगा कि प्रकृति को ‘मदर नेचर’ भी कहा जाता है। मदर यानि मां, हमारी जननी, हमें पोषित करने वाली। यह धरती हमारी मां है और हमारे अस्तित्व का कारण भी है। हमें पोषित करने के लिए यह धरती प्रकृति के ज़रिए हर वो चीज़ हम तक पहुंचाती है, जिसकी हमें ज़रूरत होती है। अगर आप ध्यान देंगे तो समझ आएगा कि आप प्रकृति के जितना करीब रहते हैं, उतना ही स्वस्थ रहते हैं। और जैसे-जैसे आप प्रकृति से दूर होने लगते हैं, तमाम तरह की मानसिक व शारीरिक परेशानियां आपको घेरने लगती है। चलिए आपको बताते हैं कि आपको प्रकृति के बीच ज़्यादा से ज़्यादा समय क्यों बिताना चाहिए।

क्यों ज़रूरी है प्रकृति के बीच रहना?

प्रकृति आपको याद दिलाती है कि जीवन कितना सुंदर है

ताज़ी हवा में सांस लेना, पहाड़ों, नदी-झरनों, जंगल, समुद्र के पास जाने और आस-पास की आवाज़ें सुनने से आपको अपने जीवन का महत्व और आस-पास की सुंदरता का एहसास होगा।

आपके मन को मिलती है शांति

शहर से दूर प्रकृति की गोद में आपके मन को शांति मिलती है। यह एक ऐसा एहसास होता है, जिससे आपको एक बार फिर शहर की तेज़ दौड़ती ज़िंदगी में हिस्सा लेने की हिम्मत मिल जाती है।

पहाड़ों का जीवन आपको सिखाता है सादगी

जब आप पहाड़ों पर जाते हैं तो शहरी जीवन की जटिलताओं से दूर हो जाते हैं। वहां के लोगों के बीच आप सादगी सीखते हैं। वहां न तो कोई आपको आपके कपड़ों से आंकता है और न ही कोई आपकी शानो शौकत से आपकी ओर खिंचता है। पहाड़ों में अगर किसी चीज़ का महत्व है, तो वो है प्रकृति से मिलने वाले उपहारों का।

नए अनुभव मिलते हैं

आप प्रकृति के जितना करीब जाएंगे, हर बार नए-नए अनुभव पाएंगे। समुद्र के पास बैठ कर लहरों की आवाज़ सुनने से आपके मन को आनंद मिलेगा। किसी जंगल के रिज़ॉर्ट में रह कर सुबह-सुबह पक्षियों की आवाज़ से उठना आपके मन को प्रफुल्लित कर देगा। आप जब भी प्रकृति के करीब होंगे, अपने आप को गहरे विचारों में खोया हुआ पाएंगे।

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प्रकृति
प्रकृति के करीब आने पर मिलती है मन को शांति | इमेज : फाइल इमेज

अब आप समझ ही गए होंगे कि प्रकृति के करीब आना आपके लिए कितना लाभदायक है। चलिए आपको बताते हैं कि आप कैसे प्रकृति की सराहना कर सकते हैं।

कैसे करें प्रकृति की सराहना?

1. अपने कदमों को धीमा करें

मंज़िल पर पहुंचने की जल्दी न करते हुए रास्ते का लुत्फ उठाएं।

2. अपनी सभी इंद्रियों को सुकून दें

हवा की ठंडक या गर्माहट को अपने चेहरे पर महसूस करें। पक्षियों की आवाज़ सुनें। फूलों और मिट्टी की खुशबू को मन में भर लें। हर एहसास का आनंद लें।

3. बारीकियों पर ध्यान दें

जब भी आप प्रकृति के पास हो, तो उसकी बारीकियों पर ध्यान दें। अगर आप किसी पत्ते पर ध्यान देंगे तो उसकी बारीक लकीरों के देख कर हैरान रह जाएंगे कि कैसे एक पत्ता दूसरे से एकदम अलग होता है। इसी तरह हर व्यक्ति का जीवन भी अलग होता है। अगर आप सबकी विभिन्नता का महत्व समझेंगे, तो ज़िंदगी खूबसूरत हो जाएगी। अगली बार जब भी अपने लिए समय निकाले, तो शहर की चकाचौंध की तेज़ ज़िंदगी से दूर जाकर प्रकृति के साथ समय बिताएं, और यह केवल एक बार नहीं बार-बार करें।

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