क्यों ज़रूरी है माइंडफुल कुकिंग?

माइंडफुल कुकिंग से बढ़ती है एकाग्रता
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‘खाना’, एक ऐसा शब्द जो किसी भी जीव के होने का आधार है। पेट भरने के लिए हर कोई खाना खोज ही लेता है, लेकिन खाना केवल पेट भरने के लिए ही नहीं बल्कि आपके शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी ज़रूरी है। ऐसा माना जाता है कि खाना बनाने वाले के मन के भाव और विचार खाने वाले की थाली तक पहुंचते हैं और फिर खाई गई हर कौर के साथ उसके पेट तक जाते हैं। इसलिए माना जाता है कि कोई कितना भी व्यस्त क्यों न हो, हर किसी को हफ्ते में कम से कम एक बार या दिन के एक समय का खाना खुद बनाना चाहिए और वो भी पूरे मन और प्यार के साथ। क्योंकि मन से बनाया गया खाना पेट भरने के साथ-साथ खाने वाले के लिए यादे भी बनाता है।

इसे ऐसे समझिए… क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि किसी ने लंच का डिब्बा खोला हो और वो खुशबू आपको अपनी नानी-दादी या मां के हाथ के खाने की याद दिला दे। या फिर कभी सोचा है कि मां के हाथ की साधारण सी खिचड़ी भी इतनी स्वादिष्ट क्यों लगती है। इसका जवाब है, प्यार! जिसे वो लोग खाना बनाते समय भर-भर के उड़ेल देती थीं। खाना बनाते समय न तो उनको किसी बात की जल्दी होती थी, न थकान लगती थी। वो बड़े प्यार के साथ खाने में डलने वाली एक-एक चीज़ को ध्यान से डालती थीं।

….बस इसी ध्यान को कह सकते हैं माइंडफुल कुकिंग।

क्या है माइंडफुल कुकिंग?

ध्यान के विशेषज्ञों यानि मेडिटेशन एक्सपर्ट्स के अनुसार माइंडफुल कुकिंग एक ऐसा अवसर है जब आप अपने मन को साध कर अपनी इंद्रियों पर केंद्रित करके किसी भी खाने को बनाते समय उसके रंग, बनावट, महक, और ध्वनि से आनंद उठाते हैं। यह एक मौका होता है जब आप क्या पका रहे हैं और क्या खा रहे हैं उसके बारे में जागरुक हो सकते हैं। ध्यानपूर्वक खाना पकाने की इस कला के अपने अनेक फायदे हैं।

माइंडफुल कुकिंग
माइंडफुल कुकिंग के है फायदे | इमेज : फाइल इमेज

माइंडफुल कुकिंग के फायदे

  1. तनाव दूर करने में सहायक – खाना बनाते समय मसालों और सब्ज़ियों की जो अलग-अलग आवाज़ें होती हैं, मसालों की खुशबू, और सब्ज़ियों के बदलते रंग आपको अपनी ओर खींचते हैं। यह वहीं समय होता है जब आप अपने मन के किसी भी नकारात्मक विचार या चिंता को भूल सकते हैं।
  2. खुद का ख्याल रखने का तरीका – हर किसी को हक व ज़िम्मेदारी है कि वो अपना खयाल रखें। ऐसे में खाना बनाने की प्रक्रिया हर दिन होती है, जो अपने साथ अवसर लाती है कि आप एकांत में खुद के लिए कुछ समय निकालें। कुछ ऐसा बनाएं जिसका ज़ायका आपकी ज़बान और स्वास्थ्य दोनो को लाभ दे। आप हफ्ते में एक बार किसी करीबी व्यक्ति के साथ खाना बनाते हुए भी समय बिता सकते हैं।
  3. आपकी एकाग्रता को बेहतर बनाता है – सबकी ज़िंदगी इतनी तेज़ी से दौड़ती है कि आधा समय तो लैपटॉप व मोबाइल पर ही निकल जाता है। ऐसे में मोबाइल को किचन से बाहर रख कर किताब में से नई रेसिपी सीखें। अगर मोबाइल से रेसिपी देखनी हो, तो नोटिफिकेशन बंद रखें। इससे आपका सारा ध्यान केवल खाना बनाने की प्रक्रिया पर रहेगा और धीरे-धीरे आपका फोकस बढ़ेगा।
  4. आत्मविश्वास बढ़ता है – माइंडफुल कुकिंग एक ऐसी कला है जिससे आप खाना बनाने के साथ-साथ अपनी पसंद और स्वाद समझते हैं। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जहां आप रचनात्मक हो सकते हैं और समय के साथ आपको पता चलने लगता है कि खाना बनाने के पीछे केवल स्वाद ही उद्देश्य नहीं, बल्कि उससे जुड़ी यादें और अनुभव भी अहम होते हैं। यह सब चीज़ें आपको आत्मविश्वास से भर देती हैं।
  5. आपको अपनो से जोड़ती है यह कला – खाने की खुशबू हमारी यादों से जुड़ जाती है। जब आप तनाव में होते हैं तो अक्सर आप वो ही खाना पसंद करते हैं, जो आप बचपन से खाते आ रहे हों या किसी अपने की याद दिलाता हो। खाने से भावनाएं जुड़ी होती हैं इसलिए अपकी पसंद की जो डिश हों उन्हें किसी त्योहार से जोड़ दें। यह कदम पीढ़ी दर पीढ़ी खाने के ज़रिए आपके परिवार की यादों को समट के रखेगा।

अब आप जब यह जान गए हैं कि माइंडफुल कुकिंग के क्या फायदे हैं, तो जब भी हो सके, खाना बनाने के लिए समय ज़रूर निकालें।

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