40 की उम्र के बाद क्यों आती है शारीरिक परेशानियां और क्या हैं बचने के उपाय?

आपका खानपान व स्ट्रैस हो सकता है इंसुलिन रेज़िस्टेंस व इंफ्लामेशन का कारण
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आजकल ब्लड-प्रेशर, टाइप-2 डायबटीज़, मानसिक परेशानियों का होना जैसे आम बात होने लगी है। जैसे-जैसे आप 40 की उम्र के पड़ाव के पास पहुंचने लगते हैं, वैसे-वैसे एक के बाद एक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां आपको घेरने लगती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन परेशानियों का आपकी उम्र से ज़्यादा आपके खान-पान, व्यायाम, और जीवनशैली से संबंध है। कुछ बीमारियां कई लोगों की वंशागत होती है, जैसे दिल संबंधी या डायबटीज़ आदि लेकिन अगर उनकी जीवनशैली अच्छी हो, तो वह इन बीमारियों के दुष्परिणाम से बच सकते हैं। जैसे-जैसे आप 40 की उम्र के पास पहुंचते हैं, आपके शरीर में बदलाव आने लगते हैं।

क्या बदलाव होते हैं 40 की उम्र में?

40 की उम्र आते-आते महिलाओं व पुरुषों को मेनोपॉज़ होने लगता है, जिसमें महिलाओं के पीरियड्स बंद हो जाते हैं, और इस्ट्रोजन लेवल कम होने से उनको दिल संबंधी परेशानियां, वज़न बढ़ने, बाल पतले होना या झड़ना और मेटाबॉलिज़्म धीमा होने जैसी परेशानियां शुरू हो जाती हैं। वहीं पुरुषों में टेस्टेस्टेरोन हार्मोन में कमी आने लगती है। इस कमी के चलते उनमें मेटाबॉलिज़्म सिंड्रोम पैदा हो जाता है, जिसे आप आम भाषा में कोलेस्ट्रॉल, हाइपरटेंशन व इंसुलिन रेज़िस्टेंस या डायबटीज़ कह सकते हैं। यह तीन परेशानियां अक्सर हार्टअटैक व स्ट्रोक का कारण बन सकती है।

न्यूजर्सी की एक न्यूरोगायनोकोलॉजिस्ट डॉ. बेट्से ग्रीनलीफ की माने तो वह आजकल युवाओं में कोलेस्ट्रॉल, हाईब्लडप्रेशर, अर्थराइटिज़ व टाइप-2 डायबटीज़ के ज़्यादा केस देख रही हैं, जिसका आम कारण तनाव व खराब खान-पान है।

मानसिक परेशानी
तनाव से दूर रहने के लिए मेडिटेशन करें | इमेज : फाइल इमेज

शरीर में इंसुलिन व इंफ्लामेशन से होती हैं परेशानियां

सैन जोस में एंटिएजिंग व हार्मोन मैनेजमेंट की विशेषज्ञ मिंडी पेल्ज़ के अनुसार बढ़ती उम्र के साथ व्यक्ति दो रोग प्रक्रियाओं से लड़ता है: सेल इंफ्लामेशन और इंसुलिन प्रतिरोध यानि रेज़िस्टेंस।

आप जितना ज़्यादा खराब तेल, मिलावट वाले खाद्य पदार्थ और ज़्यादा चीनी वाली चीज़ें खाएंगे, आपकी कोशिकाएं यानि सेल्स उतने कम अडैप्टेबल यानी शारीरिक परिस्थिति के उतनी ही कम अनुकूलनीय हो जाते हैं, और अंत में आपकी कोशिकाओं में सूजन आ जाती है और वो हार्मेन प्रतिरोधी हो जाती है। अगर एक बार आपके सेल्स में इंफ्लामेंशन और इंसुलिन रेज़िस्टेंस शुरू हो जाता है, तो एक के बाद एक बीमारियां शुरू हो जाती हैं। जैसे कि आपने देखा होगा की किसी व्यक्ति को डायबटीज़ होने के साथ-साथ हाईब्लडप्रेशर, कोलेस्ट्रॉल आदि भी होता है।

अगर आप इन बीमारियों से बचना चाहते हैं तो अपनी जीवनशैली में बदल लाइये।

  1. सिगरेट और तंबाकू का इस्तेमाल न करें।
  2. दिन में कम से कम आधे से एक घंटा शारीरिक व्यायाम करें।
  3. हार्ट-हेल्दी डाइट लें – फल-सब्ज़ियां, बींस और दालें, होल ग्रेन, हेल्दी फैट।
  4. नमक, चीनी, प्रोसेस्ड कार्बोहायड्रेट्स, मदिरा व सैचुरेटिड फैट्स का सेवन एकदम कम कर दें।
  5. अपना वज़न ज़रूरत से ज़्यादा न बढ़ने दें और न ही कम करें।
  6. अच्छी नींद लें।
  7. तनाव से दूर रहने के लिए मेडिटेशन करें।
  8.  समय-समय पर हेल्थ स्क्रीनिंग करते रहें – ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्राल लेवल, टाइप-2 डायबटीज़ आदि।

अगर आप बताई गई बातों पर ध्यान देंगे और सही जीवनशैली अपनाएंगे, तो आपको मिलेंगे ‘हैप्पी फॉर्टीज़’।

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