बच्चे सिखाते हैं ज़िंदगी के 10 खूबसूरत सबक

छोटी-छोटी चीज़ों में खुशियां तलाशना सिखाते हैं
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अभिभावक होने के नाते यदि आपको भी यह लगता है कि हमेशा सिर्फ आप ही बच्चों को कुछ न कुछ सिखाते रहते हैं, तो ज़रा ठहरिए और बच्चों की ज़िंदगी पर गौर करिए। फिर आप पाएंगे कि जिस तरह आप उन्हें हर दिन नई चीज़ें सिखाते हैं, उसी तरह उन्होंने भी तो आपको हर दिन नई ज़िम्मेदारियां उठाना सिखाया है। इतना ही नहीं, आप अपने बच्चे से ज़िंदगी के कुछ ज़रूरी सबक भी सीख सकते हैं, जो ज़िंदगी को पूरी ज़िंदादिली के साथ जीने में आपकी मदद करेंगे।

जिज्ञासु बनना

कोई भी नया खिलौना हाथ में आने के बाद बच्चे उसे उल्ट-पलटकर देखते हैं और कई बार तो खोलकर यह देखने की कोशिश करते हैं कि आखिर कार के अंदर है क्या? बच्चों का यह जिज्ञासु स्वभाव हमें भी हर नई चीज़ के बारे में अधिक से अधिक जानकारी पाने के लिए प्रेरित करता है।

छोटी-छोटी चीज़ों से खुश होना

जरूरी नहीं कि आपके महंगे तोहफे देखकर ही बच्चा खुश हो, वह तो मिट्टी में खेलकर, आपके पुराने कपड़े पहनकर या पानी में हाथ-पैर मारकर भी खुश हो जाते हैं। चिड़िया की चूं-चूं और प्यारे से कुत्ते के सहलाने पर भी उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहता। उनकी यह आदत हमेशा खुश रहने की सीख देती है, यानी आपको जो मिला है उसी में खुश रहना सीख लीजए बच्चों की तरह।

भेदभाव न करना

व्यस्क होने पर हम हर चीज़े में भेदभाव करने लगते हैं यहां तक कि सोसायटी में हम ऐसे लोगों से बाद तक करना पसंद नहीं करतें जिन्हें हम खुद से कमतर आंकते हैं, लेकिन बच्चे बिना भेदभाव के हर किसी से दोस्ती कर लेते हैं। वह रंग, जाति या प्रतिष्ठा देखकर दोस्ती नहीं करतें उनकी नजर में सब एक समान है।

भावनाएं जाहिर करना

गुस्सा होने पर बच्चे चिल्लाने लगते हैं, मनपसंद चीज़ न मिलने पर रोने और मां के दुलार पर तुरंत मुस्कुराने लगते हैं यानी वह अपने भावनाएं तुरंत जाहिर कर देते हैं, बड़ों की तरह उसे छिपाते नहीं है। भावनाएं जाहिर करने का यह गुण यदि आप भी सीख लें, तो बेकार के तनाव कम कर सकते हैं।

हर दिन मुस्कुराना

मशहूर कॉमेडियन चार्ली चैपलिन ने कहा था, ‘बिना मुस्कुराहट के बीता दिन व्यर्थ है’। बड़े न सही बच्चों ने इस बात को आत्मसात किया है तभी तो हर दिन वह छोटी-छोटी बातों पर भी खिलखिलाकर हंस पड़ते हैं और उनकी मुस्कुहारट आपका दिन बना देती है। यही नहीं बच्चों से हंसने का यह हुनर आप भी सीख सकते हैं।

पल चाहे जैसा हो बच्चे खुद को उसमें ढालते हैं | इमेज : फाइल इमेज

बार-बार कोशिश करना

जब बच्चा चलना सीखता है तो एक कदम चलते ही डगमगाकर गिर जाता है और ऐसा बार-बार होता है, बावजूद इसके वह चलने की कोशिश करना नहीं सीखता। इसी तरह आप भी हार से सबक सीखकर लगातार कोशिश करते रहिए।

निडर बनना

बच्चों को किसी चीज़ से डर नहीं लगता, चाहे वह नया गेम खेलना हो या कुछ और वह हमेशा नई चीज़ सीखने के लिए तैयार रहते हैं। हमें भी ऐसा ही होना चाहिए, कोई नया कौशल सीखने से लेकर ज़िंदगी में आए नए बदलावों का सामना भी बिना किसी डर के करना चाहिए।

वर्तमान में जीना

बच्चे को नई कार दे दीजिए फिर उस वक्त वो सिर्फ कार से खेलना पसंद करते हैं, ड्राइंग या होमवर्क के बारे में नहीं सोचते। ऐसे ही जब आप अकेले बैठकर कॉफी पी रहे हों या अपनी कोई फेवरेट फिल्म देख रहे हों तो बस उस पल का आनंद लीजिए। ऑफिस की डेडलाइन या घर के काम की टेंशन मत लीजिए।

लोग क्या कहेंगे कि चिंता न करना

बच्चों के मन में जो आता है वह करते हैं, वह यह नहीं सोचते कि उनकी किसी हरकत को देखकर लोग क्या कहेंगे। बच्चों की इस मासूम अदा को आप भी सीख लीजिए, ज़िंदगी आसान हो जाएगी।

भूल जाना

बच्चा किसी बात को लेकर दुखी हो जाता है या अपने दोस्त से नाराज हो जाता है, लेकिन अगले ही पल वह इसे भूल भी जाता है। ज़िंदगी की बुरी यादों और अनुभवों को भूलने का यह हुनर हर किसी को सीखने की जरूरत है। बच्चे मन के सच्चे होते हैं और उनसे मिली ज़िंदगी की सीख भी सच्ची होती है, जिसे अपनाकर आप भी खुलकर ज़िंदगी जी सकते हैं।

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