खुद को दुख से बाहर निकालने के लिए अपनाएं 7 उपाय

जीवन में आगे बढ़ने के लिए खुद को दुख से बाहर निकालना बहुत महत्वपूर्ण है
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कहते है मन चंचल होता है और ये कब किस तरफ पहुंच जाए किसी को पता नहीं क्योंकि  इस तेज चलती दुनिया में मन की गति सबसे तेज़ होती है। इधर उधर की बातें सोचते हुए कई बार हम अपना मन दुखी कर लेते हैं और ना चाहते हुए भी मन में एक बोझ बना लेते है। किसी ऐसे व्यक्ति या किसी चीज़ से जिसे आप प्यार करते हैं, उसे खोना जीवन की सबसे बड़ी चुनौती है। आप किसी प्रियजन की मृत्यु से दुखी हो सकते हैं।  दुख के कई कारण हो सकते हैं। उन अनेकों अलग-अलग कारणों से अक्सर हमारा मन कुछ भारी सा रहता है और हम परेशान होते रहते हैं। आपको हम इस लेख में कुछ तरीके बता रहे हैं जिनसे आप दुखी मन को हल्का कर सकते हैं।  

अपनी सच्चाई को स्वीकार करें   

आपको अपनी ज़िंदगी में असफलता मिली, आप अपने किसी क्लोज रिलेशन से दूर हो गये या आप अपनी जॉब खो बैठे और अभी बेरोजगार हो तो ऐसे समय में दुख का रोना न रोएं बल्कि बाउंस बैक करें।  बाउंस बैक का मतलब है की खुद को कमज़ोर बनाने के बजाय खुद को मजबूत बनाने के बारे में सोचे।  आप जिस भी कारण मुश्किल हालातों में फंसे हो उसे पूरे दिल से स्वीकार कर लें।  
 
बस स्वीकार कर लिया, अब इस कठिन समय से निकलने के रास्ते ढूंढिए।  आपके लिए हज़ार  रास्ते हैं बस आप कोशिश करिये। यह हमेशा याद रखे की लाइफ में जो भी होता है सब अच्छे के लिए होता है।  मुश्किल समय से निकलने के लिए आप क्या कर सकते है उसके बारे में सोचिये।  जितने प्रयास के साथ आप आगे बढ़ेंगे उतनी जल्दी आप अपने हालातों में बदलाव करने में सफल हो जायेंगे।  

मन में हमेशा पॉजिटिव विचार ही लाएं । इमेज : फाइल इमेज

बातें मन में न रखें 

अगर आपका मन किसी बात को लेकर दुखी है कि किसी व्यक्ति ने ऐसा क्यों कहा या ऐसा क्यों किया तो आप उस व्यक्ति से जाकर वो बात कह दे और समाधान कर लें। ऐसा करने से आपके मन में बना हुआ बोझ उतर जाएगा और आपका मन शांत होने साथ साथ हल्का होगा। कभी भी किसी शख्स को लेकर मन में कोई गुबार है तो उसे कहने से ना चूके और ना ही उससे डरे बल्कि सीधे कहने की हिम्मत  रखें।  

मेडिटेशन करें 

कई बार हमारे जीवन में कोई समस्या या किसी से कोई मतभेद न होने पर भी मन में एक बोझ सा बना रहता है और हम कुछ ना कुछ सोचते रहते हैं।  इसका सीधा अर्थ है कि आपका मन परेशान है और चिंतित है।इसके लिए आप मेडिटेशन करें।  रोजाना सुबह बीस मिनट का ध्यान करने से मन एकाग्र होता है और आपका दुखी मन भी खुश होने लगता है। 

दूसरों से प्रेरणा ले 

आपकी ज़िन्दगी के कठिन हालात चल रहे है, शायद आप खुद से झूठ बोल रहे है।  यकीन नहीं आया न मेरी बात का। आपने कभी उन लोगो को देखा है जो बचपन से कुछ भी देख नहीं पाते मतलब जिनकी आंखे नहीं होती, आपने उन लोगो को देखा है जो सुन नहीं सकते या बोल नहीं सकते, आपने उन लोगो को देखा है जो चल नहीं सकते या लंगड़ाते हुए चलते है, आपने उस छोटे से बच्चों को देखा जिनके माता–पिता की मृत्यु हो गई हो और वह अनाथ है, आपने उन बच्चों को देखा जिनको एक  वक्त का खाना तक नसीब नहीं होता है।  
 
अब यह पढ़कर शायद आप मेरी बात मतलब समझ गये होंगे।  हम यही बताना चाहते हैं कि जो आपके लिए कठिन समय है, वह ऐसे लोगों के लिए बहुत ही सुकून देने वाली  ज़िंदगी हो सकती है। अगर ऐसे लोगो की जीवन की कठिनाइयों से आपके कठिन हालातों की हम  तुलना करें तो स्पष्ट है कि आपकी समस्या  इन लोगों के सामने कुछ भी नहीं है। आप ऐसे लोगों से लाख गुना बेहतर स्थिति में होंगे।   
 
बस अपनी किसी इच्छा के पूरा न होने या खुद को संतुष्ट न कर पाने के कारण आप परेशान हो रहे हो।  अपनी असलियत को पहचाने और परेशानी को समझकर उसका हल ढ़ूंढें।  

अधिक न सोचे

हमारा मन इसलिए ज्यादा दुखी होता है क्योंकि हम सोचते ज्यादा हैं । अधिक सोचने से और अधिक दिमाग लगाने से मन में दुख आता है और हम परेशान होते हैं। इसलिए किसी भी काम या व्यक्ति के बारे में अधिक ना सोचे अगर आपको उससे कोई मतलब नहीं है।  बल्कि आप जो कर रहे है वो करते रहे और उसमें अपना मन लगायें।  उसी में आप अपना सौ प्रतिशत दें। 

ईमानदार

अगर आप अपने काम को लेकर, अपनी बातों को कहने को लेकर और अपनी सोच को लेकर ईमानदार है तो आपका मन कभी दुखी नहीं होगा और आपको हमेशा आगे बढ़ते चले जायेगे।  

रिश्तों को मज़बूत बनाये

दुखी मन का सबसे बड़ा कारण हमारे घर में ही मौजूद रहता है और वो है कमज़ोर रिश्ते। आप बाहर की दुनिया में कमी निकालने या उसे सुधारने से पहले खुद के घर में चल रहे रिश्तों के बिगाड़ को सही करें। जिससे आपका मन भी हल्का और आपके जीवन में दुगनी गति से खुशियां आएंगी क्योंकि परिवार ही खुशियों का आधार है। 

आप इन सभी तरीकों से खुद को दुखों से दूर कर सकते हैं। ऐसे में कोशिश करें खुद को मज़बूत बनाने की क्योंकि समय की यही मांग है। 

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