मेडिटेशन से पाएं गुस्से पर काबू

गुस्से को नियंत्रित करने के लिए ध्यान सबसे बढ़िया विकल्प है
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ध्यान वह क्रिया है जिसमें किसी एक चीज़ पर ध्यान लगाकर मस्तिष्क को विचार शून्य किया जाता है, यानी दिमाग में कोई विचार नहीं आता और मन शांत हो जाता है। हालांकि ऐसा करना आसान नहीं है, लेकिन नियमित अभ्यास से यह संभव हो जाता है और जो व्यक्ति रोज़ाना ध्यान यानी मेडिटेशन करता है उसे गुस्सा भी कम आता है।

क्या आप भी छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा हो जाते हैं और गुस्से में आपके दिल की धड़कन, सांसे और ब्लड प्रेशर हाई हो जाता है, तो आपको मेडिटेशन करने की सख्त ज़रूरत है। मेडिटेशन करने से तनाव कम होता है और जब तनाव कम हो जाएगा तो गुस्सा और चिढ़ भी कम हो जाती है।

कैसे मेडिटेशन से गुस्से पर काबू पाया जा सकता है?

तनाव कम करता है

जो इंसान छोटी-छोटी बातों पर तनावग्रस्त हो जाता है उसे गुस्सा बहुत आता है। लेकिन यदि आप मेडिटेशन का अभ्यास करें तो तनाव अपने आप कम होने लगता है और जब तनाव कम हो जाएगा तो जाहिर है गुस्सा भी नहीं आएगा।

मन की शांति

जब मन अशांत रहता है तो इंसान को बहुत गुस्सा आता है और कई बार तो गुस्से में वह अपना आपा भी खो देता है, भले ही बात में उसे इस बात का पछतावा हो। ऐसा व्यक्ति जब मेडिटेशन करने लगता है तो उसका बेचैन मन शांत हो जाता है और जब मन शांत रहता है तो गुस्से वाली परिस्थिति में भी वह बुरी तरह प्रतिक्रिया नहीं देता।

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पॉज़िटिव सोच

आपने अक्सर देखा होगा कि जिन लोगों की सोच नकारात्मक होती है उन्हें गुस्सा भी ज़्यादा आता है और स्वभाव से चिड़चिड़े होते हैं। मेडिटेशन करने से आपकी सोच सकारात्मक बनती हैं और जब आपके विचार पॉज़िटिव हो जाते हैं तो गुस्सा भी छूमंतर हो जाता है।

अच्छी नींद

नींद पूरे न होने पर अक्सर पूरे दिन चिड़चिड़ापन महसूस होता है और व्यक्ति हर बात पर गुस्से में प्रतिक्रिया देता है, लेकिन मेडिटेशन के नियमित अभ्यास से आपको अच्छी नींद आती है और सुबह एकदम तरोताज़ा महसूस करके हैं। सुबह की शुरुआत जब अच्छी होती है तो गुस्सा भी आपसे दूर रहता है।

क्या कहता है अध्ययन?

मेडिटेशन के फायदों की तस्दीक तो कई रिसर्च और अध्ययन में हो चुकी है, लेकिन एक अध्ययन के मुताबिक, यह गुस्से को कम करने में भी मददगार है। इस अध्ययन के अनुसार, मेडिटेशन का सिर्फ एक सेशन करने से गुस्से के शारीरिक संकेतों में कमी देखी गई। ऐसे लोगों में भी जिन्होंने बस मेडिटेशन की शुरुआत ही की है। इस स्टडी के मुताबिक, सिर्फ 20 मिनट के ध्यान के बाद ही अध्ययन में शामिल लोगों पहले से कहीं अधिक रिलैक्स और शांत देखे गएं। इसके अनुसार, थोड़े या लंबे समय के लिए किया गया मेडिटेशन शरीर को गुस्से के दुष्प्रभाव से बचाता है।

जो लोग सालों से मेडिटेशन कर रहे हैं गुस्से वाली परिस्थिति में भी उनके दिल की धड़कनें, सांसे और ब्लड प्रेशर नहीं बढ़ता है, क्योंकि उन्होंने मन को शांत रखना सीख लिया है।

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