याददाश्त बढ़ाने और मन की शांति से जुड़ी है ज्ञान मुद्रा

ज्ञान मुद्रा एक ऐसी हस्त मुद्रा है, जिससे बुद्धि का विकास होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है।
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योग में हस्त मुद्राओं का बड़ा महत्व बताया गया है क्योंकि हाथ की पांचों अंगुलियां पांच तत्व बताती है। जैसे कि अंगूठा अग्नि तत्व, तर्जनी अंगुली में वायु तत्व, मध्यम अंगुली में आकाश तत्व, अनामिका अंगुली में पृथ्वी तत्व और कनिष्का अंगुली में जल तत्व की मौजूदगी बताई जाती है। शरीर के किसी भी भाग में ऊर्जा और स्फूर्ति लाने में हस्त मुद्राएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। साथ ही ये रोगों से भी लड़ने में मदद करती है। यह हमारी शारीरिक-मानसिक ऊर्जा को संतुलित करती है। आज हम बताएंगे ज्ञान मुद्रा के बारे में –

ज्ञान मुद्रा क्या है?

अंगूठे और तर्जनी अंगुली यानी पहली अंगुली के स्पर्श से जो मुद्रा बनती है, उसे ज्ञान मुद्रा कहते हैं। इसके नियमित अभ्यास करने से बुद्धि तेज होती है। अंगूठा अग्नि तत्व का प्रतीक है और तर्जनी अंगुली वायु तत्व की प्रतीक है। जब ये दोनों तत्व आपस में मिलती है, तब तंत्रिका तंत्र और पिट्यूरी ग्रंथि सक्रिय हो जाती है। इससे याद करने की शक्ति और मन की एकाग्रता बढ़ाने में मदद मिलती है। ज्ञान मुद्रा को वायु-वर्धक मुद्रा और ध्यान मुद्रा के रुप में भी जाना जाता है।

ज्ञान मुद्रा के फायदे

  • इस मुद्रा से मन को शांति मिलती है।
  • बुद्धि का विकास और याद करने की शक्ति बढ़ती है।
  • इस मुद्रा को रोज़ाना करने से अनिद्रा, सिरदर्द, गुस्सा, चिड़चिड़ापन और चिंता दूर होती है।
  • यह तंत्रिका तंत्र को मज़बूत करने में सहायक है।
  • इस मुद्रा को करने से आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होती है।
बुद्धि के विकास में मददगार ज्ञान मुद्रा | इमेज : फाइल इमेज

एक्यूप्रेशर चिकित्सा में ज्ञान मुद्रा का महत्व

एक्यूप्रेशर में अंगूठे के ऊपर पिट्यूटरी और पिनियल ग्रंथियों का केंद्र माना जाता है। पिट्यूटरी मास्टर ग्लैन्ड है। शारीरिक संतुलन और व्यक्तित्व को निखारने में यह ग्रंथियां बहुत मदद करती है। अंगूठे के ऊपरी हिस्से को दबाने से दोस्ती, दया, निडर और शांत भाव का अनुभव होता है।

ज्ञान मुद्रा करने का तरीका

  • सुखासन, पद्मासन या किसी ध्यान मुद्रा में बैठें।
  • अगर आप बैठने में असमर्थ हैं, तो आप खड़े होकर भी इसका अभ्यास कर सकते हैं।
  • अपनी पीठ और सिर को सीधा रखें और अपने पूरे शरीर को आराम दें।
  • अपने हाथों को अपने घुटनों के ऊपर की दिशा में रखें।
  • अब दोनों हाथों की पहली अंगुली को अंगूठे से जोड़े और बाकी तीन अंगुलियों को सीधा रखें।
  • अपनी आंखें धीरे से बंद करें और सांस पर ध्यान केंद्रित करें।

सावधानी और उपाय

  • योगासन या प्राणायाम करते समय पेट भरा हुआ न हो।  
  • ज्ञान मुद्रा मुख्य रूप से हमारे शरीर में वायु तत्व को बढ़ाती है। इसलिए अगर आपको पेट में गैस की समस्या है, तो इस मुद्रा को करने से बचें।
  • योगासन या ज्ञान मुद्रा करने के तुरंत बाद भोजन न करें।
  • किसी भी प्रकार का दर्द या परेशानी महसूस होने पर मुद्रा को वही छोड़ दें।
  • अगर आप ज्ञान मुद्रा करते समय गर्दन में दर्द या हाथों में दर्द महसूस करते हैं, तो मुद्रा न करें।

ज्ञान मुद्रा करने के लिए सुबह का समय सबसे अच्छा होता है। फिर भी, आप दिन में किसी भी समय इस मुद्रा का अभ्यास कर सकते हैं।

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