कैसे करें माइंडफुल कुकिंग का अभ्यास?

रिश्तों के करीब लाती है माइंडफुल कुकिंग, जोड़ती है दिलों के तार
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क्या कभी कड़ाही के गरम तेल में राई या जीरा डालते हुए उसके चटकने की आवाज़ पर ध्यान दिया है, या फिर उस में डालने के लिए चॉपिंग बोर्ड पर कट रही सब्ज़ियों की कट-कट को रुककर सुना है, या सब्ज़ी में हल्दी डालते ही बदलने वाले रंग को देखा है, या टमाटर डालकर ढ़क्कन से ढक कर उसके पकने का इंतज़ार किया है। हो सकता है कि जब आप खाना बनाते हों, तो यह सारे स्टैप्स साधारण से लगते हों, लेकिन अगर आप माइंडफुल कुकिंग का अभ्यास करेंगे, तो आपको खाना बनाने की प्रक्रिया से जुड़ी हर चीज़ में शांति मिलने लगेगी।

फायदे

इससे आपका फोकस और आत्मविश्वास बढ़ने के साथ-साथ एकाग्रता भी बढ़ेगी। माइंडफुल कुकिंग से खाना बनाने वाले के साथ-साथ खाना खाने वाले को भी लाभ होता है, क्योंकि खाना बनाने वाले का प्यार उसके खाने के ज़रिए अपनो तक पहुंचता है। खाना यह संदेश देता है कि कोई है, जो आपके लिए प्यार से खाना बना रहा है, जो खाने में डलने वाली एक-एक चीज़ को ध्यान से इस्तेमाल कर रहा है। खाना बनाने वाले का प्यार, उसका समय और प्रयास खाने वाले के लिए एक बेशकीमती तोहफा होता है, क्योंकि घर के बने खाने की बात ही अलग होती है। माइंडफुल कुकिंग हर लिहाज़ से लाभदायक होती है। तो चलिए आपको बताते हैं कि कैसे अभ्यास करें माइंडफुल कुकिंग का।

कैसे अभ्यास करें माइंडफुल कुकिंग का

आनंद लें

सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि जब आप किचन में कुछ भी पकाने आएं, तो डरने की बजाय उसका आनंद लें। हर चिंता और परेशानी को कुछ देर के लिए भूल जाएं।

खाना बनाने का आनंद लें
खाना पकाते समय मन शांत रखें | इमेज : फाइल इमेज
घर पर खाना बनाएं

चाहे कितना भी बिज़ी क्यों न हों, हफ्ते में एक या दो बार खाना ज़रूर बनाएं। इससे आप अपनी किचन, मसालों और बरतनों से एक रिश्ता स्थापित करते हैं। इससे आपको कृतज्ञता का मौका मिलता है। जो आपके पास है, आप उसके लिए आभारी होते हैं।

कृतज्ञ हो

कृतज्ञतामाइंडफुल कुकिंग का एक अहम भाग होता है। जब भी आप कुछ बनाएं, तो उसमें डलने वाली सामग्री पर ध्यान दें। कुछ क्षणों के लिए रुकें और गहरी सांस भरते हुए केवल प्रेम के बारे में सोचें, और सांस छोड़ते हुएकृतज्ञता के बारे में सोचें। इस प्रक्रिया को कई बार दोहराएं।

इंद्रियों को एकाग्रित करे

माइंडफुल कुकिंग के दौरान आप अपनी इंद्रियों और खाने के बीच संबंध स्थापित करते हैं। खाना बनाते समय अलग-अलग आवाज़ों को सुनते हैं, बदलते हुए रंगों को देखते हैं, सब्ज़ियों का आकार बदलते हुए देखते हैं, हर मसाले की खुशबू को सूंघते हैं। यह सभी चीज़ें आपके लिए यादें संजोती हैं। जब आप इन सब चीज़ों पर ध्यान देते हैं, तो आप दिन भर की सारी बातों को कुछ देर के लिए भूल जाते हैं।

जब आप मन से खाना बनाते हैं, तो वह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ आपके स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक होता है। आपके खाने के ज़रिए लोगों तक आपका प्यार पहुंचता है। जिस तरह लोग किसी कला का आनंद उठाते हैं, उसी तरह आपके बनाएं हुए खाने का भी उठाएंगे। माइंडफुल तरीके से बना हुआ खाना शरीर के साथ-साथ दिमाग के लिए भी पौष्टिक होता है और इस प्रक्रिया से खाना बनाने वाले को भी सुकून मिलता है।

और भी पढ़िये : दिमाग को फोकस करना है ज़रुरी

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