प्राकृतिक आपदाओं से सीखे सबक

पर्यावरण असंतुलन है सबसे बड़ी समस्या
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पिछले करीब दो साल से कोरोना जैसी आपदा ने सभी के जीवन में कई बदलाव लाएं है और शायद इस बात को साबित भी किया है कि ‘परिवर्तन संसार का नियम है’। जब जीवन में किसी चीज़ की अति हो जाती है, तो कभी उसका अच्छा या बुरा परिणाम सामने आता है। ऐसे ही प्राकृतिक आपदा हमें जीवन में यह संकेत देने आती है कि अब बदलाव का समय आ गया है। ये अपने साथ सिर्फ बदलाव ही नहीं लाती, बल्कि जीवन की सीख भी देती है।

क्या सबक देती है प्राकृतिक आपदा?

जब पर्यावरण असंतुलन होने लगता है तब कभी बाढ़, आगजनी या भूचाल के रूप आपदाएं अपना प्रकोप दिखाती है। केदारनाथ पर हुई बाढ़ की घटना शायद ही कोई भूला हो, या पेड़ों के कटाव के कारण आए साल जंगलों में आग लगने जैसी न जाने कितनी घटनाएं देखने को मिलती है। हालांकि अगर इसका दूसरा पक्ष देखा जाए तो समझ में आता है कि परिवर्तन प्रकृति की सतत प्रक्रिया है, ऐसा परिवर्तन जिनका प्रभाव मानव हित में होता है।  

बदलाव को अपनाना

आपदा के तौर पर पूरी दुनिया के सामने एकाएक आए कोरोना वायरस ने लोगों को ज़िंदगी के बेहद कटु व अच्छे अनमोल सबक सीखने पर मज़बूर कर दिया था। कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए दुनिया की ज़्यादातर आबादी पिछले लंबे समय से अपने घरों में कैद होकर रह गयी है। वही इस आपदा के दौरान दुनिया भर में प्राकृतिक और भौगोलिक स्तर पर बहुत सारे पॉज़िटिव बदलाव देखने को मिले हैं। इनमें से कुछ पॉज़िटिव है, तो कुछ बहुत ज़्यादा नेगेटिव भी रहे। जहां एक तरफ  प्रकृति और पर्यावरण बेहतर हुआ था, वही लोगों ने अपनों को भी खोया था। फिलहाल आजतक इस वायरस के कारण अजीबोगरीब स्थिति बनी हुई है लेकिन सभी ने सेहत और काम में हो रहे बदलावों को काफी हद तक अपना लिया है।

इंसानियत और मानवता

कोरोना काल हो या फिर कोई अन्य आपदा, सच पूछो तो भागती दुनिया को एकाएक रोककर यह सोचने का मौका दिया है कि भविष्य में इंसान व इंसानियत के लिए क्या ज़रूरी है। जैसे कोरोना वायरस ने दुनिया को सोचने के लिए मज़बूर कर दिया है कि आपदा के समय मे कैसे एक-दूसरे की मदद करें और हौसला बढ़ाएं। लोगों में जीवों के प्रति इंसानियत का भाव जगा है।

हिम्मत और विश्वास

हर प्राकृतिक आपदा अपने साथ कई परेशानियां लेकर आती है। जिसमें इंसानों ने अपना बहुत कुछ गंवाया है, अपने परिवार को खोया है, अपने वजूद को भी गंवाया है। फिर भी इन सभी हालात में इंसान को कुछ न कुछ सीखने का अवसर देती है। ऐसा क्यों हुआ, खुद को कोसने जैसे भावों को निकालकर उन हालातों को हिम्मत के साथ सामना करना सिखाया है। जब हम हिम्मत दिखाते हैं, तो महूसस होता है कि आपदा आई है, तो एक दिन ज़रूर चली भी जाएगी।  

धैर्य

कोरोना व लॉकडाउन का यह काल ज़िंदगी का सबसे बड़ा यह सबक है कि अगर व्यक्ति में संतोष का भाव है, तो वह बेहद सीमित संसाधनों में परिवार के साथ रह कर आपसी भाईचारे व प्यार मोहब्बत से खुशहाल जीवन व्यतीत कर सकता है।

प्रत्येक आपदा एक सबक दे जाती है, जिसमें जीवन में मौजूदा खामियां उजागर होती हैं। अगर हम उससे सीख ले सकें, तो भविष्य में हम आपदा में सुधार की आशा कर सकते हैं।

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