मानसिक और शारीरिक मज़बूती देती है – पृथ्वी मुद्रा

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जब शरीर का पृथ्वी तत्व जागृत होता है, तो अग्नि तत्व कम हो जाता है। कुछ यही काम करती है पृथ्वी मुद्रा, इसलिए इसे बहुत अहम मुद्रा माना जाता है। इसे अग्नि-शामक मुद्रा भी कहा जाता है। इस मुद्रा में अनामिका अंगुली पृथ्वी तत्व से सबंधित है, जब इस पर दबाव पड़ता है, तो कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं को दूर करने में मदद मिलती है। 

पृथ्वी मुद्रा महत्वपूर्ण क्यों है?

अनामिका और अंगूठे के स्पर्श से जो मुद्रा बनती है, उसे पृथ्वी मुद्रा कहते हैं। यह शरीर के पृथ्वी तत्व को संतुलन में लाकर खुद से जुड़ने में मदद करती है। योग में, पृथ्वी मुद्रा मन को शांत करती है और ज़मीनी स्तर से जुड़ा हुआ महसूस कराती है।

अध्यात्म के अनुसार पृथ्वी मुद्रा में जब अनामिका अंगुली अंगूठे के संपर्क में आती है, तो मस्तिष्क की पीनियल ग्रंथि उत्तेजित होती है और शरीर के उपचार तंत्र में मदद करती है। यह मुद्रा शरीर में ‘पृथ्वी’ तत्व की कमी के कारण फैलने वाली बीमारियों को दूर करने में मदद करती है और शरीर की क्षमता को बढ़ाती है।

फायदे

  • शरीर में शक्तिशाली तंतुओं का निर्माण होता है जो शरीर को बलशाली बनाते हैं।
  • हड्डियों के साथ मांसपेशियां, नाखून और आंतरिक अंग स्वस्थ होते हैं।
  • आंख, नाक, कान के रोगों से छुटकारा मिलता है।
  • बालों का झड़ना बंद हो जाता है।
  • शरीर की रोग प्रतिकार शक्ति बढ़ने के साथ शारीरिक कमज़ोरियां भी खत्म हो जाती है।
  • गले में बार-बार खराश होना, गले में दर्द रहना जैसे रोगों को दूर करता है।
  • आत्मविश्वास की कमी को दूर करता है।
  • तनाव मुक्त करती है।
ज़मीनी स्तर से जुड़ा हुआ महसूस कराती है | इमेज : फाइल इमेज

इस मुद्रा को करने का तरीका

  • जो आसन करने में सहज महसूस हो उस आसन में बैठिये।
  • दोनों हाथों की अनामिका अंगुली यानी रिंग फिंगर को अंगूठे की नोक से स्पर्थ करें।
  • बाकी बची अंगुलियों को सीधा रखें।
  • अब आंखों को बंद करें और गहरी सांस लेकर छोड़े दें।
  • अपनी सांस की गति पर ध्यान दें। ऐसा करने से चित्त को आराम देने में मदद मिलेगी।
  • इस मुद्रा को रोज़ाना 30 से 40 मिनट तक करें।

रखें कुछ बातों का ध्यान

  • अपनी अंगुलियों पर ज़ोर न दें।
  • इस मुद्रा को करते समय हाथों में गहने या घड़ी न पहनें।
  • इस मुद्रा को करने के लिए कोई शांत जगह ही चुनें।
  • मुद्रा के लिए किसी आसान का प्रयोग करें, सीधा ज़मीन या फर्श से शरीर को स्पर्श ना होने दें।
  • ध्यान न भटके इसके लिए फोन को दूर रखें।

पृथ्वी मुद्रा करने का सही समय

किसी भी मुद्रा या योग को करने के लिए सुबह का समय सबसे अच्छा होता है, क्योंकि उस समय हमारा दिमाग एकदम फ्रेश और शांत होता है। इसलिए आसानी से मन को एकाग्र कर पाते हैं। सबसे अच्छे परिणामों के लिए सुबह 4 से 6 बजे के बीच इस मुद्रा को करना चाहिए। अगर समय नहीं है, तो शाम को भी इस मुद्रा को कर सकते हैं।

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