आयुर्वेदिक आहार क्या है? वात, पित्त और कफ में क्या खाएं, क्या न खाएं

आयुर्वेद के अनुसार ऐसा भोजन करना चाहिए जिससे शऱीर के तीनों दोषों में संतुलन बना रहे
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आयुर्वेद आपके शरीर और मन में संतुलन स्थापित करने के लिए समग्र दवा के रूप में काम करता है। बात चाहे आयुर्वेदिक चिकित्सा की हो या भोजन की। इसका मकसद सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं होता, बल्कि मानसिक रूप से स्वस्थ होना भी शामिल है। आयुर्वेद में संतुलित आहार के लिए भोजन के 6 रस को शामिल करने के साथ ही हर व्यक्ति के लिए उसके शरीर के हिसाब से आहार योजना बनाने की सलाह दी गई है। आयुर्वेदिक आहार भोजन का एक पैटर्न है जो हज़ारों साल पुराना है।

क्या है आयुर्वेदिक आहार?

आयुर्वेदिक आहार में व्यक्ति के दोष के हिसाब से खाद्य पदार्थों के चुनाव की सलाह दी जाती है। इसका मकसद शरीर की अलग-अलग ऊर्जा को संतुलित करके आपको स्वस्थ रखना है। आयुर्वेद में वात, पित्त और कफ दोष में संतुलन बनाए रखने के लिए दोष के हिसाब से व्यक्ति के लिए आहार की सूची तैयार की जाती है कि उन्हें क्या खाना है और क्या नहीं। आप भी इसे फॉलो कर सकते हैं। आयुर्वेदिक आहार का मकसद सिर्फ भूख मिटाना नहीं होता, बल्कि आपको सूंपूर्ण रूप से स्वस्थ रखना होता है।

क्या खाएं?

अपने दोष के अनुसार आपको इन खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए।

पित्त
  • प्रोटीन से भरपूर चीज़े खाएं जैसे चना, दालें, मूंग, राजमा, काले सेम खाएं।
  • डेयरी उत्पाद दूध, घी, बटर का सेवन करें।
  • फल में मीठे गूदेदार फल जैसे संतरा, पेर, अनानास, केला, खरबूज और आम खाएं।
  • सब्ज़ियों में मीठे और कड़वे स्वाद वाली सब्ज़ी खाएं जैसे पत्तागोभी, फूलगोभी, सेलरी, खीरा, ज़ुकीनी, पत्तेदार सब्ज़ियां, शकरकंद, गाजर आदि।
  • अनाज में जौ, जई, बासमती चावल, गेहूं खाएं।
  • आप कद्दू के बीज, अलसी, सूर्यमुखी के बीज और नारियल भी खा सकते हैं।
  • मसालों में थोड़ी सी कालीमिर्च, जीरा, दालचीनी, सोआ, धनिया और हल्दी का सेवन करें।
वात
  • डेयरी उत्पाद में दूध, बटर, दही, चीज़, घी खाएं।
  • पूरी तरह से पके और मीठे फल जैसे केला, ब्लेबेरी, स्ट्रॉबेरी, ग्रेपफ्रूट, आम, पीच और आड़ू खाएं।
  • पकी हुई सब्ज़ियां खाएं, जिसमें बीट, शकरकंद, प्याज़, मूली, शलजम गाजर और हरी बीन्स शामिल होनी चाहिए।
  • चना, दालें, मूंग खाएं।
  • अनाज में पका हुआ ओट्स और पका हुआ चावल खाएं।
  • बादाम, अखरोट, पिस्ता, चिया सीड, अलसी और सूर्यमुखी के बीज़ों का सेवन करें।
  • इलायची, अदरक, जीरा, तुलसी, लौंग, ऑरिगेनो, कालीमिर्च जैसे मसालों का इस्तेमाल करें।
कफ
  • डेयरी उत्पाद में मलाई निकाला हुआ दूध, बकरी का दूध, सोया दूध का इस्तेमाल करें।
  • सेब, ब्लूबेरी, पेर, अनार, चेरी जैसे फल खाएं और किशमिश, अंजीर, सूखा आलूबुखारा खाएं।
  • सब्ज़ियों में पत्तेदार सब्ज़ियां, प्याज़, आलू, मशरूम, मूली, भिंडी को शामिल करें।
  • सभी तरह ही फलियां, चना व दाल का सेवन करें।
  • जई, जौ, मक्का, बाजरा आदि अनाज खाएं।
  • थोड़े से कद्दू के बीज, सूर्यमुखी के बीज, अलसी का सेवन करें।
  • जीरा, कालीमिर्च, हल्दी, अदरक, दालचीनी, तुलसी, ऑरिगेनो समेत किसी भी मसाले का इस्तेमाल कर सकते हैं।
वात-पित्त-कफ
शारीरिक अवस्था से जुड़े है दोष | इमेज : फाइल इमेज

क्या न खाएं?

अपने दोष के अनुसार आपको इन खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।

पित्त
  • डेयरी उत्पाद में खट्टी क्रीम, चीज़, छाछ
  • फल में खट्टे और कच्चे फल जैसे- अंगूर, एप्रीकॉट, खट्टे चेरी
  • सब्ज़ियों में मिर्च, चुकंदर, टमाटर, प्याज़, बैंगन
  • अनाज में ब्राउन राइस, बाजरा, मक्का
  • बादाम, काजू, मूंगफली, पिस्ता, अखरोट, तिल
  • मसालें जो ऊपर बताई गई लिस्ट में शामिल नहीं हैं, उनका सेवन न करें।
वात
  • सूखे, कच्चे या हल्के फल जैसे किशमिश, क्रैनबेरी, अनार और पेर
  • सब्ज़ियों में कोई भी कच्ची सब्ज़ी, इसके अलावा पकी हुई ब्रोकोली, पत्तागोभी, फूलगोभी, मशूरूम, टमाटर और आलू भी न खाएं।
  • राजमां, काले सेम से परहेज़ करें
  • जौ, गेहूं, मक्का, किनोआ, बाजरा
  • कड़वे और कसैले मसाले जैसे पार्स्ले, थाइम और धनिया के बीज

कफ

  • फलों में केला, नारियल, आम, ताज़े अंजीर
  • सब्ज़ियों में शकरकंद, टमाटर, ज़ुकीनी, खीरा
  • सोयाबीन, राजमा
  • चावल, गेहूं, पका हुआ अनाज
  • काजू, ब्राज़ील नट्स, तिल, अखरोट

अपने शरीर के दोष के अनुसार यदि आप भोजन करते हैं, तो पूरी तरह से स्वस्थ रहेंगे।

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