प्राणायाम का अर्थ और उद्देश्य क्या है?

जीवन शक्ति से जुड़ी है ‘प्राणायाम’
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प्राणायाम मेडिटेशन हमारे पुरखों की इजाद की ऐसी तकनीक है, जो मानव जाति के लिए उपहार है। अगर हम प्राणायाम की बात करे तो यह योग के 8 अंगों में से चौथा अंग है। पुराने ज़माने में लोग इसका नियमित अभ्यास करते थे और स्वस्थ रहते थे। अष्टांग योग में प्राणायाम का एक विशेष स्थान और महत्व है। महर्षि पतंजलि के अष्टांगयोग का चतुर्थपाद में लिखा है कि ” प्राणास्य आयाम: इति प्राणायाम:” इसका मतलब प्राण का विस्तार ही प्राणायाम है।

प्राणायाम किसे कहते है?

यह श्वास की क्रियाओं से संबंधित है। स्थूल रूप में यह जीवनधारक शक्ति अर्थात प्राण से संबंधित है। प्राण का अर्थ श्वास, श्वसन, जीवन, ऊर्जा या शक्ति है। ‘आयाम’ का अर्थ फैलाव, विस्तार, प्रसार, लंबाई, चौड़ाई, विनियमन बढ़ाना, अवरोध या नियंत्रण है। इस प्रकार प्राणायाम का अर्थ श्वास का दीर्घीकरण और फिर उसका नियंत्रण है।

प्राणायाम का अर्थ

प्राणायाम शब्द संस्कृत व्याकरण के दो शब्दों से मिलकर बना है, प्राण और आयाम। प्राण का अर्थ होता है जीवन शक्ति जो हमारे शरीर को जीवित रखती है। जिसके द्वारा हमारे शरीर को ऊर्जा मिलती है। जब हम प्राण यानी कि वायु को लेते हैं और बाहर निकालते हैं तब हमारे शरीर को ऊर्जा मिलती है। आयाम का अर्थ दिशा देना या बदलाव करना। जब हम प्राण वायु को खींचते हैं, तो हम उसकी दिशा पर नियंत्रण प्राप्त करते हैं। हम अपनी इच्छा अनुसार उसका आयाम बदल देते हैं सामान्य सांस आने और जाने की गति तो निरंतर होती ही रहती है। लेकिन प्राणायाम में हम अपने स्वास्- प्रवास की गति (सांस लेने रोकने) पर नियंत्रण स्थापित करते हैं, उसे प्राणायाम कहते हैं।

हम जब सांस लेते हैं तो शरीर के अंदर जा रही हवा पांच भागों में फैलती है या कहें कि वह शरीर के अंदर पांच जगह स्थिर हो जाता हैं। ये पंचक निम्न हैं- व्यान, समान, अपान, उदान और प्राण।

प्राणायाम क्रिया
मन की चंचलता कम करके मन को स्थिर करता है | इमेज : फाइल इमेज

प्राणायाम की तीन क्रियाएं

प्राणायाम करते या सांस लेते समय हम तीन क्रियाएं करते हैं- पूरक, कुम्भक और रेचक। इसे ही हठयोगी अभ्यांतर वृत्ति, स्तम्भ वृत्ति और बाह्य वृत्ति कहते हैं। इसका मतलब यानी की सांस को लेना, रोकना और छोड़ना।

1. पूरक – जिसमे नासिका द्वारा सांस को अंदर की तरफ लेते है उसे पूरक कहा जाता है।

2. कुम्भक – जिसके अंतर्गत सांस लेकर भीतर रोकना होता है। सांस को भीतर रोकने की क्रिया कुम्भक कहलाती है।

3. रेचक – सांस को बाहर की तरफ छोड़ना रेचक अर्थात नासिका द्वारा सांस को बाहर की तरफ छोड़ने की क्रिया रेचक कहलाता है।

फायदे

प्राणायाम व्यक्ति के मन, मस्तिष्क और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। प्राणायाम करने से मन को शांति मिलती है। मन स्थिर होता है। मन की चंचलता कम करके मन को स्थिर करता है। इससे चिंता, तनाव जैसी परेशानियों से छुटकारा मिलता है। माना जाता है कि जो लोग प्राणायाम करते हैं, उनकी उम्र लंबी होती है। कहते हैं कि प्राणायाम के अभ्यास से ही ऋषि मुनि लंबे समय तक तपस्या किया करते थे।   

प्राणायाम का उद्देश्य

इसका मुख्य उद्देश्य शरीर में ऊर्जा लाना। शरीर और मन के बीच संबंध मजबूत करना। स्वस्थ और लंबी उम्र प्रदान करना। 

तो फिर आप प्राणायाम को अपने जीवन का हिस्सा बनाइये और इसे बेहतर तरीके से करने के लिए आप किसी प्रोफेशनल की मदद ले सकते हैं। इसे  बेहतर तरीके से जानने के लिए आप thinkright.me एप पर भी जा सकते हैं।

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