जानिये क्या है बौद्ध मेडिटेशन और तकनीक ?

सभी समस्याओं को दूर करने का वरदान है बौद्ध मेडिटेशन
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बौद्ध धर्म में मेडिटेशन की परिभाषा और इसके विभिन्न प्रकारों के बारे में कई तरह के विचारों को  शामिल किया गया है। वैसे इसे आमतौर पर मानसिक कसरत के रूप में जाना जाता है, जो दिमाग की शांति, एकाग्रता और जागरूकता से जुड़ा होता है। जिस तरह शरीर के लिए शारीरिक व्यायाम काम करता है वैसे ही मेडिटेशन दिमाग के लिए एक अभ्यास है।

बौद्ध मेडिटेशन क्या है?

मेडिटेशन बौद्ध धर्म में जीने का एक तरीका है। बौद्ध मेडिटेशन ऐसी तकनीकें हैं, जो व्यक्ति को  जीवन में एकाग्रता, स्पष्टता और पॉज़िटिव भावनात्मक की ओर प्रोत्साहित करती हैं। गौतम सिद्धार्थ ने छठी शताब्दी ईसा पूर्व में एक आध्यात्मिक शिक्षक थे। उनकी शिक्षाएं बौद्ध धर्म की नींव के रूप में काम करती है। अपने आध्यात्मिक ज्ञान को मेडिटेशन के ज़रिए दुनियाभर में प्रसारित किया गया। जैसे-जैसे यह ज्ञान फैलता गया, लोगों ने मेडिटेशन की विशेषताओं और आध्यात्मिक शक्तियों को अपनाना शुरु किया। आज यही मेडिटेशन पूरी दुनिया में पढ़ाई जाती है और इसका नियमित अभ्यास किया जाता है। बौद्ध धर्म के सभी रूप दुख के कारणों, खुशी के कारणों और एक स्वस्थ और रचनात्मक जीवन जीने के दिशानिर्देशों को दर्शाते हैं।

बौद्ध मेडिटेशन तकनीक  

अब तक पूरी दुनिया में विभिन्न परंपराओं के साथ बौद्ध ने मेडिटेशन को ज़ेन, विपश्यना, निचिरेन आदि कई रूपों में विकसित किया हैं।

बौद्ध मेडिटेशन
बौद्ध धर्म की नींव है मेडिटेशन |इमेज : फाइल इमेज

शमथा

इसे अंग्रेजी में माइंडफुलनेस कहा जाता है। बौद्ध मेडिटेशन में शमथा लोकप्रिय अभ्यास है, जो शांति, स्पष्टता और समभाव विकसित करने पर केंद्रित है। इसके उचित मार्गदर्शन से व्यक्ति गहरी आंतरिक शांति की ओर जा सकता है। जब विपश्यना (जागरूकता) प्रथाओं के साथ जोड़ा जाता है, तो यह गहन अंतर्दृष्टि और आध्यात्मिक जागृति को जन्म दे सकता है।

करने का तरीका
  • सुखासन या पद्मासन में सीधे बैठ जाइये
  • अपनी सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित करिए
  • मन में जो भी विचार आ रहे हैं, उन्हें जाने दीजिए
  • सिर्फ सांसों पर ध्यान रखिए
  • इसे आप गाइडेड मेडिटेशन के ज़रिए भी कर सकते हैं।

लविंग काइंडनेस मेडिटेशन

बौद्ध मेडिटेशन में एक अन्य लोकप्रिय तरीका है मेटा या काइंडनेस मेडिटेशन। इस मेडिटेशन के भी कई रूप हैं। इसे मन को स्थिर और ग्रहणशील बनाने के लिए शमथा से शुरू करते हैं। इस मेडिटेशन में प्रेम और दयाभाव को महसूस करने के बारे में है। व्यक्ति इस मेडिटेशन में एक मंत्र को दोहरा सकते हैं, जो इस अभ्यास को करने में प्रेरित करता है।  जैसे कि ‘मैं और सभी जीवित प्राणी सुरक्षित, खुश और शांतिपूर्ण हैं’।

करने का तरीका
  • आरामदायक स्थिति में बैठे
  • अपनी आंखें बंद करें और सांसों पर ध्यान दें
  • अपने भावना पर ध्यान केंद्रित करें और कल्पना करें आपके अंदर प्यार, दया और परोपकार की भावना पैदा हो रही है।
  • दूसरों के प्रति नेगेटिव विचारों मन से निकाल दें

जब आपको लगे कि आपका ध्यान पूरा हो गया है, तो धीरे से अपनी आंखें खोलें। याद रखें कि यही पॉज़िटिव भावनाओं दिनभर बना रहे।

मननशील मेडिटेशन

बौद्ध शिक्षाएं कुछ मूलभूत मान्यताओं को शेयर करती हैं। जो व्यक्ति को एकाग्र, आंतरिक तरीके से चिंतन यानी की आत्मचिंतन के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। यह सबसे प्रसिद्ध चिंतनों में से एक है जिसे “द फोर थॉट्स दैट ट्रांसफॉर्म द माइंड” कहा जाता है। इस मेडिटेशन का उद्देश्य गहराई में जाना, उसको कई प्रकार से सोचना है। चिंतन से ही जीवन का आनंद मिलता है।

बुद्ध ने दुख से मुक्ति पाने के लिए एक आवश्यक उपकरण के रूप में मेडिटेशन करना सिखाया था। आज की दुनिया में हर किसी को शारीरिक, मानसिक या भावनात्मक रूप से समस्या बनी रहती है। ऐसे में बौद्ध मेडिटेशन के ज़रिये आप सभी समस्याओं से आसानी से निजात पा सकते हैं।

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